गद्दाफ़ी के गढ़ में घुसी विद्रोही सेना

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Image caption बनी वलीद गद्दाफ़ी समर्थकों के कब्ज़े में बचे चंद शहरों में एक है.

लीबिया में विद्रोही फ़ौजें बनी वलीद में प्रवेश कर गई हैं.

बनी वलीद लीबिया के चार शहरों में से एक है जिसपर अभी भी कर्नल गद्दाफ़ी के समर्थकों का क़ब्ज़ा है.

विद्रोहियों की ओर से मुख्य वार्ताकार ने कहा है कि उनकी सेना अब शहर के मुख्य भाग से महज़ कुछ किलोमीटर की दूरी पर है और कुछ ही घंटों में पूरा शहर उनके नियंत्रण में होगा.

विद्रोहियों का कहना है कि उनके पास हमला करने के अलावा और कोई चारा नहीं था क्योंकि उनपर दूसरी तरफ़ से हमले हो रहे थे.

विद्रोहियों ने पहले गद्दाफ़ी समर्थकों को हथियार डालने के लिए शनिवार तक का समय दिया था.

सियर्ट

दूसरी तरफ़ ग़द्दाफ़ी के गृह नगर सियर्ट के पास लड़ाई तेज़ हो गई है.

बीबीसी के एक संवाददाता का कहना है कि विद्रोहियों को हर एक किलोमीटर पर नियंत्रण के लिए काफ़ी कठिन लड़ाई लड़नी पड़ रही है.

बनी वलीद से बीबीसी संवाददाता रिचर्ड गाल्पिन का कहना है कि वार्ताकार ने उनसे कहा है कि शहर पर हमले में पूरी ताक़त का इस्तेमाल नहीं किया गया है ताकि कम नुक़सान हो.

हालांकि इस बात की पुष्टि हो गई है कि हमले में अबतक कम से कम चार लोगों की मौत हो गई है.

कई लोग घायल भी हुए हैं.

रेड नोटिस

इस बीच अंतरराष्ट्रीय जाँच एजेंसी इंटरपोल ने मुअम्मर गद्दाफ़ी, उनके बेटे सैफ़ अल-इस्लाम और सेना के ख़ुफ़िया तंत्र के पूर्व निदेशक अब्दुल्ला अल-सेनुसी के ख़िलाफ 'रेड नोटिस' जारी कर दिया है.

ख़बरों के अनुसार गद्दाफ़ी की सेना के एक वरिष्ठ जनरल भागकर नीजेर चले गए हैं जहां उनकी पहचान जनरल अली काना के तौर पर की गई है.

गद्दाफ़ी के सुरक्षा प्रमुख रहे मंसूर दॉ पहले ही नीजेर की राजधानी नियामी पहुँच चुके हैं.

'रेड नोटिस' अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक चेतावनी है कि ये लोग वांछित हैं.

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