आर्थिक विकास के लिए तेल ज़रुरी

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Image caption लीबिया तेल उद्योग के लिए तीन बेसिन सिर्ती, मूरजूक और पेलेजिएन पर पूरी तरह से निर्भर है

लीबिया का लंबे समय तक समृद्व रहना जिस चीज़ पर सबसे ज़्यादा निर्भर करता है वो है उसका तेल निर्यात.

लीबिया की अरबों डॉलर की संपत्ति के इस्तेमाल पर लगी रोक को हटाना देश के पुनर्निर्माण के लिए मुख्य हो सकता है लेकिन बिना तेल के अर्थव्यवस्था को स्थिर रखना मुश्किल है और इसी के बलबूते लोकतंत्र मज़बूत होगा.

लीबिया का तेल उद्योग ही वहां की अनुभवहीन हुक़ूमत की क़ामयाबी में भूमिका निभाएगा और लोगों की तरक्क़ी में भी मदद करेगा.

देश के कुल आर्थिक विकास में तेल चौथाई भूमिका निभाता है और 95 फ़ीसदी उसकी आमदनी इसके निर्यात से होती है.

लेकिन देश में चल रहे गृह युद्व से यहाँ के तेल क्षेत्रों से रिसाव हो रहा है और उत्पादन भी प्रतिदिन 50,000 बैरल से कुछ ज़्यादा हो रहा है. इससे पहले तक तेल का ये उत्पादन एक अरब 60 करोड़ बैरल का था.

एक शोध समूह क्रॉस बॉडर इंफ़ॉर्मेशन के लिए काम करने वाले जॉन हेमिल्टन का कहना है, ''लीबिया अपने इस संसाधन का इस्तेमाल न करने का ख़तरा नहीं उठा सकता. देश का दोबारा निर्माण करने पर बहुत ज़्यादा ख़र्चा होगा. जनता की माँगों पर खरा उतरने के लिए उसे तेल के उत्पादन पर ध्यान देना होगा और उसकी शुरुआत करनी होगी. ''

निर्भरता

लीबिया तेल उद्योग के लिए तीन बेसिन- सिर्ती, मूरजूक और पेलेजिएन पर पूरी तरह से निर्भर है.

सिर्ती सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण है क्योंकि वहां क़रीब 80 फ़ीसदी तेल का उत्पादन होता है. इसलिए यहाँ से सारी दिक़्कतों को दूर करना बहुत अहम हो जाता है. यहाँ सुरक्षा मुहैया करवाना सबसे महत्वपूर्ण है.

शोध समूह एक्सक्लूज़िव एनालिसिस में ऊर्जा के प्रमुख तैमूर होसेनोव का कहना है कि रिपोर्टों के अनुसार वहाँ गद्दाफ़ी के समर्थकों ने बारुदी सुरंगें बिछाई हुई हैं जिससे अहम कर्मचारियों की वापसी में दिक़्क़त आ सकती है.

उनका कहना है कि पहले बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करना होगा, तेल उत्पादन में हफ़्तों की देरी हो सकती है, शायद एक महीना भी लग जाए.

इसकी तुलना में मूरजूक और पेलेजिएन बेसिन में कम दिक़्कते हैं.

वहां तेल के नए क्षेत्र हैं और सुरक्षित हैं. लेकिन होसेयनोव का कहना है कि मूरजूक से लेकर त्रिपोली जाने वाली पाइप लाइन लड़ाई की वज़ह से बर्बाद हो चुकी है.

नई पाइप लाइन बनने में छह महीने लगेंगे वहीं टूट-फूट को ठीक करने के लिए कुछ हफ़्तों का समय लगेगा.

समय

लड़ाई से पहले तेल का जो उत्पादन होता था उस आंकड़े तक दोबारा पहुँचने के लिए और पुनर्निर्माण को लेकर जो कठिनाइयाँ आ रही हैं उसे लेकर जो अनिश्चतता के बादल छाए हुए हैं वह कब छटेंगे उसके बारे में अंदाज़ा लगाना मुश्किल है.

एनर्जी रिसर्च कंपनी वुड मैक्नज़ी का कहना है कि इसमें तीन साल का समय और लगेगा, वहीं अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी और लीबिया की नेशनल ऑयल कंपनी के नए प्रमुख का कहना है साल 2013 से पहले ये नामुमकिन है.

लीबिया में जितनी जल्द तेल का उत्पादन शुरु होगा वह ना केवल देश के लिए बल्कि दुनिया के लिए बेहतर होगा.

हालांकि लीबिया दुनिया की तुलना में दो फ़ीसदी ही तेल निकालता है लेकिन वहाँ मिलने वाला विशेष किस्म का तेल केवल कुछ ही देशों जैसे नाइजीरिया और अज़रबैजान में निकाला जाता है.

होसेनोव का कहना है कि लीबिया में निकाला जाने वाला कच्चा तेल उच्च गुणवत्ता वाला होता है और दुनिया को उसकी ज़रुरत है. उसका इस्तेमाल परिवहन और ऊर्जा बनाने के कामों में अहम रूप से होता है.

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