इतिहास के पन्नों में- 17 सितंबर

इसी दिन 1944 में जहाँ हॉलैंड में मित्र सेनाओं की फ़ौजों को एक हज़ार से ज़्यादा विमानों के ज़रिए दुश्मनों के इलाक़े में उतारा गया तो वहीं 1970 में जॉर्डन में गृह युद्ध की शुरुआत हो गई.

1944- हॉलैंड पर हवाई हमले की शुरुआत

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption जॉर्डन की सेना ने पूरे जॉर्डन में कई नगरों में फ़लस्तीनी छापामारों पर हमला कर दिया

जर्मनी के विरुद्ध संघर्ष कर रही 'मित्र सेनाओं' के लड़ाकू यान हॉलैंड में अपने दुश्मन के इलाक़ों में उतरे और इसी के साथ यूरोप में युद्ध के अंत के लिए एक बड़ा अभियान शुरू हुआ.

ब्रितानी आरएएफ़ लैंकेस्टर के अलावा अमरीका के विमानों ने जर्मन ठिकानों और बैरकों को निशाना बनाया.

सैनिक साज़ो-सामान से लैस हज़ारों सैनिक दोपहर के समय पैराशूट से राइन डेल्टा में उतरे. इस संघर्ष में कई जर्मन लड़ाकू विमान मार गिराए गए.

ब्रितानी, अमरीकी और पोलैंड के वायु सैनिकों को साथ लेकर बने 'फ़र्स्ट एयरबोर्न अलाइड आर्मी' का ये पहला प्रमुख अभियान था. इसकी कमान यूएस नाइन्थ एयर फ़ोर्स के पूर्व कमांडर लेफ़्टिनेंट जनरल लुइस ब्रेरेटन के हाथों में थी.

पड़ोसी देश बेल्जियम में प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने सैकड़ों विमान आसमान में देखें. मौसम भी इस तरह के अभियान के अनुकूल था जहाँ बादलों में डकोटा विमानों को छुपने का मौक़ा मिला.

उधर जर्मनी की न्यूज़ एजेंसी ने इस हमले की घोषणा की मगर साथ ही बताया कि उनकी फ़ौजों ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी.

उनकी ओर से बताया गया कि जर्मन फ़ौजों ने आक्रमणकारियों की बड़ी तादाद को ख़त्म कर दिया है.

1970- जॉर्डन में गृह युद्ध

जॉर्डन की सेना ने पूरे जॉर्डन में कई नगरों में फ़लस्तीनी छापामारों पर हमला कर दिया. इससे पहले दोनों पक्षों के बीच छिपपुट हिंसा जारी थी.

शाह हुसैन के जनरलों ने राजधानी अम्मान में तड़के टैंक घुसने के आदेश दे दिए जबकि मोर्टार हमले का जवाब रॉकेटों से दिया जा रहा था.

ज़ेर्का नगर में भी भीषण युद्ध हो रहा था. ये नगर देश के उत्तर में सामान पहुँचाने के रास्ते में एक अहम पड़ाव था.

इस संघर्ष में दोनों पक्षों ने जीत के दावे किए. अम्मान रेडियो ने कहा कि जॉर्डन की सेना का तीन चौथाई शहर पर क़ब्ज़ा हो गया है जबकि फ़लस्तीनी सूत्रों ने कहा कि पूरे शहर पर उनका नियंत्रण है.

अम्मान हवाई अड्डा और देश की सीमाएँ बंद थीं तथा दूरसंचार की लाइनें भी ठप हो गईं.

शाह हुसैन के सैनिक फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन के मुख्यालय में भी घुस गए. मगर पीएलओ के प्रमुख यासिर अराफ़ात के बारे में कुछ पता नहीं चला.

संबंधित समाचार