गद्दाफ़ी के गढ़ पर विद्रोहियों का हमला

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Image caption सियर्ट में विद्रोहियों को कड़े मुक़ाबले का सामना करना पड़ रहा है.

लीबिया में राष्ट्रीय अस्थाई परिषद यानि एनटीसी के अधिकारियों ने कहा है कि उसके सैनिकों ने कर्नल गद्दाफ़ी के गढ़ माने जाने वाले शहर सियर्ट पर फिर से हमला कर दिया है.

सियर्ट उन चार शहरों में से एक है जिस पर अभी भी गद्दाफ़ी के वफ़ादार सैनिकों का क़ब्ज़ा है.

एनटीसी के अनुसार उसके सैनिकों ने गुरूवार की शाम को सियर्ट पर हमला किया और वे शहर के दक्षिण और पश्चिम क्षेत्र में सुरक्षा घेरे को तोड़ने में कामयाब हो गए है.

उन्होंने कहा कि उनके लड़ाके सियर्ट शहर के केंद्र से केवल आठ किलोमीटर दूर थे लेकिन फिर गद्दाफ़ी के वफ़ादार सैनिकों के भारी विरोध के कारण उन्हें पीछे हटना पड़ा.

एनटीसी के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि उनके लड़ाके युद्ध में घायल लोगों के इलाज के लिए दो किलोमीटर तक पीछे हटने पर मजबूर हो गए थे.

सियर्ट में घुसने पर उन्हें गद्दाफ़ी के वफ़ादार सैनिकों की एक विशेष टुकड़ी से मुक़ाबला करना पड़ा था.

टीएनसी के अनुसार इस लड़ाई में उनके चार लड़ाके मारे गए और सात घायल हुए थे. लेकिन मिस्राता मिलिट्री काउंसिल के हवाले से मिली एक ख़बर के अनुसार इसमें 11 लड़ाके मारे गए और 34 घायल हुए थे.

'हमलोग मज़बूत हैं'

कर्नल गद्दाफ़ी के प्रवक्ता मूसा इब्राहिम ने सीरिया के एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि हज़ारों स्वंयसेवक लीबिया को एनटीसी से आज़ाद कराने के लिए तैयार हैं.

मूसा इब्राहिम ने फ़ोन के ज़रिए दिए गए अपने बयान में कहा, ''हमलोग मज़बूत स्थिति में हैं. हमारे पास पूरे लीबिया को आज़ाद कराने की क्षमता, साधन और योजना है.''

सियर्ट के अलावा बनी वलीद और साभा में गद्दाफ़ी समर्थकों का क़ब़्ज़ा बना हुआ है.

पिछले सप्ताह विद्रोहियों ने दावा किया था कि वे बनी वलीद को कुछ ही घंटों में अपने नियंत्रण में ले लेंगे लेकिन उन्हें गद्दाफ़ी समर्थक सैनिकों ने उन्हें पीछे धकेल दिया था.

एक अपुष्ट ख़बर के मुताबिक़ विद्रोहियों का एक जत्था शुक्रवार को बनी वलीद पर एक बार हमला करने वाला है.

इस बीच इन दिनों अरब देशों की यात्रा कर रहे तुर्की के प्रधानमंत्री तैय्यप इरोदगान शुक्रवार को लीबिया पहुंचे. वे पूरे अरब जगत में तुर्की के प्रजातंत्र और उदारवादी इस्लाम की वकालत कर रहें हैं.

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Image caption गुरूवार को कैमरन और सारकोज़ी ने लीबिया का दौरा किया था.

इससे पहले गुरूवार को फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने त्रिपोली का दौरा किया था. कर्नल गद्दाफ़ी के सत्ता से हटने के बाद लीबिया का दौरा करने वाले वे दोनों पहले नेता थे.

दोनों नेताओं ने एनटीसी के गढ़ और विद्रोह के मुख्य केंद्र बेनग़ाज़ी का भी दौरा किया था. बेनग़ाज़ी में हज़ारों की संख्या में सड़कों पर उतरकर लोगों ने दोनो नेताओं का स्वागत किया था.

शुक्रवार को ही एनटीसी पड़ोसी देश नीजेर में एक प्रतिनिधि मंडल भेजने वाला है. प्रतिनिधिमंडल का मुख्य उद्देश्य त्रिपोली के पतन के समय भारी मात्रा में सोना और नक़दी लेकर नीजेर भागने वाले गद्दाफ़ी के समर्थकों से उस संपत्ति को वापस लेना है.

पिछले महीने त्रिपोली के पतन के समय गद्दाफ़ी के रिश्तेदार और बहुत निकट समझे जानेवाले कम से कम 36 लोग पड़ोसी देश अलजीरिया और नीजेर भाग गए थे.

एनटीसी के प्रमुख अब्दुल जलील ने कहा कि वो अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत के ज़रिए वांछित लोगों को लीबिया के हवाले किए जाने के लिए उन देशों से अपील करेंगे.

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत ने कर्नल गद्दाफ़ी के अलावा उनके पुत्र सैफ़ुल इस्लाम और उनके ख़ुफ़िया प्रमुख पर मानवता के विरूद्द अपराध करने का आरोप लगाया था.

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