फ़लस्तीन राष्ट्र की मान्यता के लिए आवेदन

  • 17 सितंबर 2011
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Image caption अमरीका राष्ट्रपति महूमद अब्बास के प्रस्ताव का विरोध कर रहा है.

राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इस बात की पुष्टि की है कि वो फ़लस्तीन राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता के लिए संयुक्त राष्ट्र के समक्ष अगले हफ़्ते आवेदन प्रस्तुत करेंगे.

रामल्ला से राष्ट्र को दिए गए एक संबोधन में महमूद अब्बास ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से वो ये मांग करेंगे कि 1967 की सीमा को मानते हुए

फ़लस्तीन को नए राष्ट्र के रुप में स्वीकृति दे दी जाए.

उन्होंने कहा कि पूर्वी येरूशलम इस देश की राजधानी होगी. पश्चिमी तट और गज़ा पट्टी इसका हिस्सा होंगे.

ये सभी इलाक़े वर्ष 1967 से इसराइल के क़ब्ज़े में हैं.

महमूद अब्बास का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण मान्यता फ़लस्तीनियों का वैध अधिकार है.

अमरीकी विरोध

उन्होंने कहा कि वो चाहते हैं कि इसराइल के साथ शांति वार्ता फिर से शुरू हो.

अमरीका ने कहा है कि वो फ़लस्तीन की इस मांग को रूकवाने के लिए अपने वीटो यानि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के भीतर विशेषाधिकारों का प्रयोग करेगा.

अमरीका का कहना है कि फ़लस्तीनी मुल्क की स्थापना इसराइल से बातचीत के ज़रिए ही संभव हो सकती है.

इस क़दम को लेकर इसराइल ने भयानक अंजाम की चेतावनी दी है.

इस बीच सैकड़ों फ़लस्तीनियों और इसराइली सेना के बीच झड़पें हुई हैं.

अनिश्चय की स्थिति

पश्चिमी तट से बीबीसी संवाददाता जॉन डानीसन का कहना है कि कि महमूद अब्बास संयुक्त राष्ट्र की अपनी रणनीति को लेकर सभी को अनिश्चय की स्थिति में रखना चाहते हैं.

हालांकि फ़लस्तीन जानता है कि उसकी ये कोशिश उसकी स्थिति में बहुत बदलाव नहीं लाएगी लेकिन इससे इसराइल पर इस मामले में दबाव बढे़गा.

बीबीसी संवाददाता जरमी बोवेन के मुताबिक फ़लस्तीन की ओर से दिए जाने वाले प्रस्ताव पर अगर वीटो भी कर दिया जाता है तब भी महासभा अन्य सदस्य मिलकर फ़लस्तीन की सदयस्ता के स्तर को बढ़ा सकते हैं.

मुमकिन है कि फ़लस्तीन को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय जैसे संस्थानों में इसराइलों के खिलाफ़ मामले चलाने की छूट मिल जाए.

इस बीच इसराइल की ओर से दी गई हिंसा बढ़ने की चेतावनी को लेकर वेस्ट बैंक इलाके में यहूदी बस्तियों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

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