इतिहास के पन्नों में - 18 सितंबर

अमरीका और सोवियत संघ के बीच 1987 में 18 सितंबर ही के दिन परमाणु मिसाइलों की संख्या घटाने पर महत्वपूर्ण सहमति हुई थी. इसी दिन इसरायल और मिस्र के बीच 1978 में शांति समझौता हुआ था.

1987 : रीगन ने की 1000 परमाणु मिसाइलें घटाने की घोषणा

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Image caption रोनाल्ड रीगन और मिखाईल गोर्बाच्योफ ने दिसंबर में इस समझौते पर दस्तख़त किए

अमरीका के राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने 1987 में आज ही के दिन ये घोषणा की थी कि आने वाले कुछ सालों में 1000 परमाणु मिसाइलें ख़त्म कर दी जायेगीं.

रीगन ने दुनिया को बताया कि अमरीका और शीत युद्ध के ज़माने का उसका सबसे बड़ा शत्रु सोवियत संघ इस बात के लिए राज़ी हो गए हैं कि हज़ारों परमाणु मिसाइलें अगले कुछ सालों में चरणबद्ध तरीके से घटा दी जायें.

रूस और अमरीका के बीच में परमाणु हथियार घटाने के लिए दोनों महाशक्तियों के बीच यह पहला ठोस समझौता था. इस समझौते से पहले परमाणु हथियारों के आविष्कार के बाद से क़रीब 50 सालों तक परमाणु हथियार केवल बढ़ ही रहे थे.

समझौते में मध्यम और कम दूरी की मिसाइलों को कम किया जाना तय हुआ. ये सभी मिसाइलें यूरोप के कई मुल्कों और सोवियत संघ में थीं.

हालाँकि नष्ट की जाने मिसाइलों की तादाद दुनिया भर में उस समय तक मौजूद परमाणु हथियारों का महज़ तीन फ़ीसदी थीं. विश्व में शांति के लिए काम करने वालों ने इस कदम का स्वागत किया.

आख़िरकार अमरीका के राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और सोवियत संघ के सर्वोच्च नेता मिखाईल गोर्बाच्योफ ने दिसंबर के महीने में इस समझौते पर दस्तख़त कर ही दिए.

1978 : अरब इसरायल सहमती

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Image caption राष्ट्रपति जिमी कार्टर की मौजूदगी में मिस्र के राष्ट्रपति अनवर अल सादत और इसरायल के प्रधानमंत्री मेनाकेम बेगिन शांति के लिए राज़ी हुए .

आज ही के दिन 1978 में अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर की मौजूदगी में मिस्र के राष्ट्रपति अनवर अल सादत और इसरायल के प्रधानमंत्री मेनाकेम बेगिन शांति के लिए राज़ी हुए थे.

इस समझौते के लिए बाद बेगिन और सादत संयुक्त रूप से नोबल शांति पुरस्कार से नवाजे गए थे.

दो हफ़्तों तक चली तूफानी वार्ताओं के बाद यह बैठक अमरीका के कैम्प डेविड में हुई थी.

समझौते के चलते इसरायल ने मिस्र का सिनाई इलाका खाली कर दिया. बदले में मिस्र ने इसरायल को राष्ट्र के तौर पार मान्यता दे दी.

अरब लीग के देशों ने इस समझौते के लिए मिस्र की कड़ी निंदा की और मिस्र को अरब लीग में अपनी जगह से हाथ धोना पड़ा.

सादत विवादों का शिकार हो गए और 1981 के अक्टूबर महीने में उनकी हत्या कर दी गई.

इस समझौते में फ़लस्तीन के लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार दिया गया था.

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