ज़्यादा लोग फ़लस्तीनी राष्ट्र के पक्ष में

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Image caption फ़लस्तीनी प्रशासन को मनाने की कोशिश की जा रही है कि वह संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव न रखे

बीबीसी के एक वैश्विक सर्वेक्षण से पता चला है कि ज़्यादा लोग संयुक्त राष्ट्र की ओर से फ़लस्तीनी राज्य के रूप में मान्यता दिए जाने का समर्थन करते हैं.

19 देशों में किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि 49 प्रतिशत लोग इस प्रस्ताव का समर्थन करते हैं जबकि 21 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि उनका देश इस प्रस्ताव का विरोध करे.

चार मुस्लिम देशों और चीन में बहुमत में लोग इस प्रस्ताव के समर्थन में हैं.

उल्लेखनीय है कि फ़लस्तीनी अगले हफ़्ते संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता के लिए आवेदन करने वाले हैं.

वे चाहते हैं कि 1967 की सीमाओं के आधार पर उनके देश को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दे दी जाए. इसके तहत देश की सीमाओं में पश्चिमी तट, पूर्वी यरुशलम और गज़ा पट्टी शामिल है.

इसराइल और अमरीका का कहना है कि फ़लस्तीनी राष्ट्र सिर्फ़ सीधी बातचीत के आधार पर बन सकता है.

इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच बातचीत एक साल पहले टूट गई थी.

सर्वेक्षण

लोगों की राय के अनुसार ज़्यादा लोग इस पक्ष में हैं कि मतविभाजन के आधार पर इसका फ़ैसला होना चाहिए.

उन देशों में भी जहाँ विरोध मज़बूत है, प्रस्ताव का विरोध करने वाले कम हैं और समर्थन करने वाले अधिक.

अमरीका और फ़िलिपीन्स दोनों ही देशों में 36 प्रतिशत लोगों ने इस प्रस्ताव के विरोध में राय दी लेकिन 45 प्रतिशत अमरीकियों और 56 प्रतिशत फ़िलीपिन्स के लोगों ने फ़लस्तीन राष्ट्र को मान्यता देने का पक्ष लिया.

सबसे कम समर्थन भारत के लोगों ने किया जहाँ 32 प्रतिशत लोगों ने इसका समर्थन किया जबकि 25 प्रतिशत लोगों ने इसका विरोध किया जबकि कई लोगों की कोई राय नहीं थी.

मिस्र में समर्थन सबसे अधिक था जहाँ 90 प्रतिशत लोगों ने इसका समर्थन किया और सिर्फ़ नौ प्रतिशत लोगों ने इसका विरोध किया.

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Image caption फ़लस्तीन राष्ट्र को मान्यता देने के पक्ष में उस देश के लोग भी हैं जहाँ इसकी उम्मीद नहीं थी

दूसरे मुस्लिम देशों में तुर्की में 60 प्रतिशत ने समर्थन किया तो 19 प्रतिशत ने विरोध, पाकिस्तान में 52 प्रतिशत ने समर्थन किया 12 प्रतिशत ने विरोध जबकि इंडोनेशिया में 51 प्रतिशत ने समर्थन किया तो 16 प्रतिशत ने विरोध किया.

चीन में 56 प्रतिशत लोगों ने इसका समर्थन किया और सिर्फ़ नौ प्रतिशत लोगों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया.

यूरोपीय देशों में भी स्थिति इससे भिन्न नहीं है. फ़्रांस में 54 प्रतिशत ने समर्थन किया तो 20 प्रतिशत ने विरोध, जर्मनी में 53 प्रतिशत ने समर्थन किया तो 28 प्रतिशत ने विरोध और ब्रिटेन में 53 प्रतिशत ने समर्थन किया तो 26 प्रतिशत ने विरोध किया.

कुल मिलाकर 30 प्रतिशत लोगों ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया और कहा या तो ये कहा कि इस प्रस्ताव के मतदान में या तो उनके देश को भाग नहीं लेना चाहिए या फिर उनकी कोई राय ही नहीं थी.

रूस और चीली में आधे से अधिक लोगों की कोई ठोस राय नहीं थी.

इस सर्वेक्षण के लिए 19 देशों में 20, 466 लोगों से या तो आमने सामने या फिर टेलीफ़ोन पर बात की गई.

ये सर्वेक्षण तीन जुलाई से तीन अगस्त के बीच किया गया था.

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