पूरे नहीं होंगे सहस्त्राब्दि लक्ष्य

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Image caption अफ्रीका के कुछ देशों में हालात अत्यंत खराब बताए जाते हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि सिर्फ सात प्रतिशत विकासशील देश नवजात शिशुओं और गर्भवती माताओं की मृत्यु दर के मामले में संयुक्त राष्ट्र सहस्त्राब्दि लक्ष्यों को तय कर सकेंगे.

ब्रिटेन की मेडिकल पत्रिका लांसेट में छपे शोध के अनुसार 2015 शिशु और माताओं के बेहतर स्वास्थ्य के मामले में तय किए गए संयुक्त राष्ट्र के सहस्त्राब्दि लक्ष्यों को कम ही देश पूरा कर पाएंगे.

हालांकि पत्रिका में कहा गया है कि विकासशील देशों में इस दिशा में प्रगति ज़रुर हो रही है.

शोध में भारत में नवजात शिशुओं और माताओं ही हालत में महत्वपूर्ण प्रगति बताई गई है लेकिन कई अफ्रीकी देशों में हालात चिंताजनक ही बताए गए हैं.

शोध के अनुसार सब सहारा अफ्रीका के 23 देश सहस्त्राब्दि लक्ष्यों को बिल्कुल पूरा नहीं कर सकेंगे और उनके लिए इन लक्ष्यों को पूरा करने में कम से कम और तीस साल का समय लगेगा.

इस रिपोर्ट के अनुसार शिशुओं और माताओं की मृत्यु दर में कमी आई है लेकिन अभी भी धनी और गरीब देशों के बीच बड़ी खाई बरकरार है.

1990 में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की जो मृत्यु दर थी उसकी तुलना में इस समय स्थिति बेहतर ज़रुर बताई जाती है लेकिन कम से कम 100 विकासशील देश ऐसे हैं जिनमें ये दर इतनी तेज़ नहीं है कि वो सहस्त्राब्दि लक्ष्यों को 2015 तक पूरा कर ले.

शोध के अनुसार इरीट्रिया, लाइबेरिया और अफ़गानिस्तान में प्रसव से जुड़ी मौतों की संख्या बहुत अधिक है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि मृत्यु दरों में कमी नहीं आने को विश्व स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी कार्रवाई की असफलता के तौर पर देखा जा सकता है.

शोध में कहा गया है कि बच्चों को विटामिन ए जैसी मूलभूत चीज़ें उपलब्ध कराने के लिए बहुत जटिल स्वास्थ्य व्यवस्था की ज़रुरत नहीं है लेकिन इसके बावजूद इस तरह की सुविधाएं आम नहीं हो पा रही हैं.