लीबिया में फिर दूतावास खोल रहा है अमरीका

  • 21 सितंबर 2011
एनटीसी प्रमुख मुस्तफ़ा अब्दुल जलील के साथ ओबामा इमेज कॉपीरइट Getty
Image caption राष्ट्रपति ओबामा ने विश्वास दिलाया कि लीबिया को अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल रहेगा

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि उनके देश के राजदूत त्रिपोली जा रहे हैं जहाँ अमरीकी दूतावास फिर से खोला जाएगा. ओबामा ने ये घोषणा एनटीसी के प्रमुख मुस्तफ़ा अब्दुल जलील के साथ न्यूयॉर्क में हुई बैठक के बाद की.

दूसरी ओर सत्ता से हटाए गए नेता कर्नल मुअम्मर गद्दाफ़ी ने विरोधियों को चेतावनी दी है कि नैटो देशों की सुरक्षा हमेशा मुहैया नहीं रहेगी.

उधर अफ़्रीकी संघ ने लीबिया की राष्ट्रीय अंतरिम परिषद यानी एनटीसी को देश की सरकार के तौर पर मान्यता दे दी है. अफ़्रीकी देशों के संघ ने कहा है कि वह एनटीसी की सबको साथ लेकर चलने वाली सरकार बनाने में मदद करेंगे.

फ़िलहाल अफ़्रीकी संघ के अध्यक्ष इक्वेटोरियल गिनी के राष्ट्रपति टियोडोरो ओबियांग एनगुएमा ने कहा, "अफ़्रीकी संघ एकजुट, लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और समृद्ध लीबिया के निर्माण में लीबियाई लोगों को समर्थन देने के लिए तैयार है."

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक से पहले न्यूयॉर्क में ये घोषणा की.

वहीं एनटीसी के नेता मुस्तफ़ा अब्दुल जलील ने ओबामा से मिलने के बाद संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को लीबिया के घटनाक्रम में भागीदारी के लिए धन्यवाद दिया मगर साथ ही चेतावनी भी दी कि काम तो अभी शुरू हुआ है.

'अब भी चुनौतियाँ'

उन्होंने कहा, "गद्दाफ़ी अब भी लीबिया में है और उनके पास अब भी ऐसे संसाधन हैं जो न सिर्फ़ लीबियाई लोगों बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए ख़तरनाक हैं."

जलील का कहना था, "हमारे सामने की राह अब भी काफ़ी लंबी है और कई स्तरों पर काफ़ी चुनौतियाँ हैं. हमारी ज़रूरतें काफ़ी हैं, हमारे 25 हज़ार लोग शहीद हुए हैं और उसके दोगुने घायल हैं."

इस बीच अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने लीबिया के मामले में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के 'साहस और मिलकर कुछ करने की इच्छा' की तारीफ़ की है.

उनका कहना था कि अमरीकी राजदूत त्रिपोली के लिए रवाना हो चुके हैं.

ओबामा ने बताया, "हमारे दूतावास पर हमले के बाद जो झंडा हमने उतारा था वो फिर से खुल रहे अमरीकी दूतावास में दोबारा चढ़ाया जाएगा."

उन्होंने लीबियाई लोगों को भरोसा दिलाया कि वे आगे भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समर्थन को लेकर आश्वस्त रह सकते हैं.

उधर बनी वलीद और कर्नल गद्दाफ़ी के जन्मस्थान सियर्त में संघर्ष जारी है. वहाँ गद्दाफ़ी समर्थकों की ओर से कड़ा प्रतिरोध हो रहा है.

गद्दाफ़ी विरोधी सैनिकों ने बनी वलीद पर बड़ा हमला किया मगर दोनों ओर से ज़बरदस्त गोलीबारी के बाद उन्हें पीछे हटना पड़ा.

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