इसराइल की फ़लस्तीन से बातचीत की पेशकश

Image caption नेतान्येहू ने कहा है कि महमूद अब्बास को बहुपक्षीय गतिविधियों में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास से सीधी बातचीत की पेशकश की है.

महमूद अब्बास ने पहले कहा था कि वो नेतन्याहू से मिलना चाहते हैं लेकिन फ़लस्तीनी राष्ट्र को संयुक्त राष्ट्र की मान्यता दिलवाने की पेशकश को आगे बढ़ाने को लेकर भी वो प्रतिबद्ध हैं.

अमरीका और इसराइल फ़लस्तीनी नेता की इस पेशकश का विरोध कर रहे हैं और इसे लेकर पैदा हुए संकट को टालने के लिए कूटनीतिक गतिविधियों में तेज़ी आ गई है.

वार्ता टूटी

इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच शांति वार्ता एक साल पहले टूट गई थी.

फ़लस्तीनी 1967 में मौजूद सीमा के आधार पर अपने राष्ट्र को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता दिलवाना चाहते हैं.

ऐसा होने पर पश्चिमी तट, पूर्वी यरुशलम और गज़ा पट्टी पर फ़लस्तीनियों का नियंत्रण हो जाएगा.

इसराइल और अमरीका का कहना है कि फ़लस्तीनी राष्ट्र को केवल सीधी बातचीत के ज़रिए हासिल किया जा सकता है लेकिन फ़लस्तीनी नेतृत्व का कहना है कि इस रवैये से अब तक कुछ भी हासिल नहीं हो सका है.

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Image caption फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास

फ़लस्तीनी नेता अब्बास ने कहा है कि शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने के बाद वो महासचिव बान की मून को अपने प्रस्ताव का लिखित प्रतिवेदन सौंपेंगे.

अगर संयुक्त राष्ट्र महासचिव इस प्रस्ताव अनुमोदन कर देते हैं तो सुरक्षा परिषद इस पर विचार करेगी और उसके बाद इसपर वोटिंग कराई जाएगी.

इस प्रस्ताव को पारित कराने के लिए सुरक्षा परिषद के 15 में से नौ सदस्यों की सहमति अनिवार्य है. इसके साथ ही ये भी ज़रूरी है कि परिषद के स्थायी सदस्यों में से कोई भी इसे वीटो न करे.

लेकिन अमरीका ने कहा है कि वो अपने वीटो के अधिकार का इस्तेमाल करेगा.

अगर ऐसा होता है तो महमूद अब्बास पर्यवेक्षण बढ़ाने के लिए महासभा में वोटिंग की मांग रख सकते हैं.

सांकेतिक महत्व

बेन्यामिन नेतन्याहू ने फ़लस्तीनी अथॉरिटी के अध्यक्ष महमूद अब्बास से कहा है कि बहुपक्षीय गतिविधियों में समय बर्बाद करने की बजाए उन्हें इस्राइल के साथ सीधी बातचीत शुरू करनी चाहिए.

उन्होंने कहा, ''मैं फ़लस्तीनी अथॉरिटी के अध्यक्ष से न्यूयॉर्क में सीधी बातचीत की शुरुआत करने की गुज़ारिश करता हूं जो कि येरुसलम और रामल्ला में भी जारी रहेगी.''

विश्लेषकों का कहना है कि इस्राइल की ये पेशकश दरअसल संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता हासिल करने की महमूद अब्बास की कोशिशों को रोकने के लिए है.

फ़लस्तीन को संयुक्त राष्ट्र की मान्यता का वैसे तो केवल सांकेतिक महत्व है लेकिन फ़लस्तीनियों का तर्क है कि इससे इस्राइल के साथ शांति वार्ता में उनका पक्ष मज़बूत होगा, ख़ासतौर से अंतिम निर्णय के समय.

न्यूयॉर्क के रास्ते में महमूद अब्बास ने कहा कि पेशकश को रोकने के लिए उनपर भारी दबाव है.

अमरीकी दबाव

दोनों पक्षों के बीच समझौते का कोई रास्ता निकालने के लिए मध्य-पूर्व में हुई कई दिन की राजनयिक कोशिशों के बाद कूटनीतिज्ञ अब न्यूयॉर्क में मुलाक़ातें कर रहे हैं.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि समझौते की गुंजाइश अभी भी बाक़ी है, लेकिन दो देशों के निर्माण के आधार पर समस्या का समाधान केवल बातचीत से ही संभव है.

उन्होंने कहा, ''ये मायने नहीं रखता कि इस हफ़्ते क्या होता है और क्या नहीं होता. लेकिन इस बैठक में वो नतीजा क़तई नहीं निकलेगा जिसकी सब लोग आस लगाए बैठे हैं.''

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Image caption अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन दोनों देशों के बीच बातचीत के पक्ष में हैं

ऐसी ख़बरें हैं कि यूरोपीय संघ, संयुक्त राष्ट्र, अमरीका और रूस के प्रतिनिधि और मध्य-पूर्व के वार्ताकार बातचीत पर लौटने की दिशा में काम कर रहे हैं ताकि संयुक्त राष्ट्र में

अलग फ़लस्तीनी राष्ट्र के निर्माण की महमूद अब्बास की पेशकश को आने से पहले ही रोका जा सके.

इस्राइल

फ़लस्तीनियों की तरफ़ से संयुक्त राष्ट्र में ये क़दम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब मध्य-पूर्व में इसराइल अलग-थलग पड़ गया है.

मिस्र, तुर्की और जॉर्डन के साथ उसके रिश्ते हाल के महीनों में ख़राब हुए हैं.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने तुर्की के विदेश मंत्री अहमत दावूतोग्लू से न्यूयॉर्क में मुलाक़ात की है और उन्हें स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ये वक़्त क्षेत्र में और ज़्यादा तनाव और अस्थिरता बढ़ाने का नहीं है.

कभी एक-दूसरे के निकट सहयोगी रहे तुर्की और इस्राइल के बीच पिछले साल उस समय तनाव पैदा हो गया जब इस्राइली सुरक्षा बलों ने राहत सामग्री ले जा रही तुर्की की एक नौका पर फ़ायरिंग कर दी थी जिसमें नौ तुर्की नागरिक मारे गए थे.

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