यमन में हिंसा जारी, छह की मौत

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यमन की राजधानी सना में तीसरे दिन भी लगातार हिंसा जारी है और छह लोग मारे गए हैं. शहीदी चौक में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के जमावड़े पर गोलीबारी हुई.

रविवार और सोमवार को भी राष्ट्रपति सालेह के समर्थकों और विरोधियों के बीच हुई थी झड़पों में 50 से ज़्यादा लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

इस संकट से उबरने के लिए कूटनीतिक स्तर पर प्रयासों को तेज़ कर दिया गया है. गल्फ़ कॉपरेशन काउंसिल और संयुक्त राष्ट्र के दूत सना में हैं पर सुलह कराने में असफल रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र के दूत जमाल बेनोमार ने स्थिति की जानकारी देते हुए बीबीसी को बताया, " स्थिति बेहद तनावपूर्ण है. राजधानी तीन गुटों में बटी हुई है..सरकार सर्मथक सैनिक, विद्रोही जनरल अली मोहसेन के समर्थक सैनिक और हमार बंधुओं के प्रति वफ़ादार मिलिशिया. रात भर लड़ाई हुई है. देश आर्थिक संकट की कगार पर है."

सरकार विरोधी सैनिक

लोगों ने गल्फ़ कॉपरेशन काउंसिल और सऊदी अरब के ख़िलाफ़ भी विरोध प्रदर्शन किए है. लोगों के मुताबिक परिषद सालेह का समर्थन कर रहा है.

राष्ट्रपति सालेह के विरोधियों ने साल की शुरूआत से ही राजधानी के कई हिस्सों पर क़ब्ज़ा किया हुआ है. उनकी मांग है कि राष्ट्रपति सालेह को अपदस्थ किया जाए.

राष्ट्रपति सालेह ने देश पर तीन दशकों से ज़्यादा समय से सत्ता संभाली है और जून में अपने ही परिसर में घायल होने के बाद से वे सउदी अरब में रह रहे हैं.

उन्होंने सत्ता छोड़ने से इनकार कर दिया है. ताज़ा हमला पिछले कुछ महीनों का सबसे भयंकर हमला है.

प्रत्यक्षदर्शीयों के अनुसार सना में इमारतों की छतों से सरकारी निशानेबाज़ विरोधियों पर निशाना लगा रहे हैं. लेकिन मंत्रियों ने इन आरोपों को लगातार ग़लत बताया है.

सरकारी बल सेना की उस टुकड़ी से भी जूझ रही है, जो कुछ महीनों पहले विरोधियों के साथ हो लिए थे.

जानकारों का कहना है कि देश पर अपना अधिकार जमाने की आख़िरी लड़ाई सरकारी सेना और सेना की उस टुकड़ी के बीच होगी जो कि विरोधियों के साथ हैं.

बीबीसी के मध्यपूर्व संवाददाता जॉन लाइन का कहना है कि आम आदमी सेना के दो धड़ों के बीच होने वाले झगड़े में पिस रहे हैं.

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