सार्कोज़ी को मध्य पूर्व में हिंसा की आशंका

  • 22 सितंबर 2011
सार्कोज़ी और महमूद अब्बास इमेज कॉपीरइट AP
Image caption निकोला सार्कोज़ी के अनुसार फ़लस्तीनियों की माँग पर अमरीका को वीटो नहीं करना चाहिए

फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी ने चेतावनी दी है कि अगर संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता की फ़लस्तीन की माँग पर अमरीका ने वीटो लगाया तो मध्य पूर्व में हिंसा की एक नई लहर आ सकती है.

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा से अपील की है कि वह फ़लस्तीनी सुरक्षा परिषद के ज़रिए पूर्ण सदस्यता की जो माँग कर रहे हैं अगर वह नहीं मानी जा सकती तो कम से कम फ़लस्तीनियों को पर्यवेक्षक का दर्ज़ा तो दिया ही जा सकता है.

मगर साथ ही सार्कोज़ी ने इसराइलियों और फ़लस्तीनियों के बीच वार्ता फिर से शुरू करने का आह्वान किया. साथ ही उन्होंने एक साल में दोनों पक्षों के बीच एक निश्चित समझौते से जुड़ी एक योजना भी रखी.

इस पर अभी तक इसराइलियों, फ़लस्तीनियों या अमरीकियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. अमरीका भी नहीं चाहता है कि उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस बारे में वीटो का इस्तेमाल करना पड़े.

इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भाषण में कहा था कि शांति संयुक्त राष्ट्र में बयानों या प्रस्तावों के ज़रिए हासिल नहीं हो सकती बल्कि इसका एकमात्र ज़रिया सिर्फ़ वार्ता है.

ओबामा ने कहा कि मध्य पूर्व में शांति का कोई शॉर्ट कट नहीं है.

उन्होंने कहा, "मैं पूरी तरह आश्वस्त हूँ कि दशकों से चले आ रहे संघर्ष को ख़त्म करने का कोई शॉर्ट कट नहीं है. बयानबाज़ी और संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव से शांति नहीं आ सकती. अगर ये इतना आसान होता, तो बहुत पहले ही इसे हासिल कर लिया गया होता."

फ़लस्तीनी कोशिश

फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास फ़लस्तीन को अलग राष्ट्र के रूप में मान्यता दिलाने के लिए संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव रखना चाहते हैं.

लेकिन अमरीका इसका विरोध कर रहा है. अमरीका का कहना है कि सिर्फ़ बातचीत से ही इसका हल निकाला जा सकता है. इसराइल भी इसका विरोध कर रहा है.

महासभा को संबोधित करते हुए ओबामा ने कहा कि आख़िरकार विवादित मुद्दे इसराइल और फ़लस्तीनियों को ही सुलझाना है, हमें और आपको नहीं.

एक फ़लस्तीनी अधिकारी ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र को फ़लस्तीनी प्रस्ताव पर विचार के लिए समय दिया जाएगा.

उधर ओबामा की इसराइली प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू से मुलाक़ात हुई है और फ़लस्तीन नेता महमूद अब्बास से भी वह मिलेंगे.

फ़िलहाल अब्बास फ़लस्तीन को एक राष्ट्र का दर्जा दिलाने संबंधी काग़ज़ात शुक्रवार को रखने को कटिबद्ध दिख रहे हैं. उससे पहले वह संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे.

अगर संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून फ़लस्तीन की माँग को मान लेते हैं तो सुरक्षा परिषद उस पर विचार करेगी और मतदान होगा. इस प्रस्ताव को पारित होने के लिए 15 सदस्य देशों में से कम से कम नौ का समर्थन चाहिए होगा और किसी भी स्थाई सदस्य की ओर से कोई वीटो नहीं आना चाहिए.

मगर अमरीका ने कह रखा है कि वह ऐसे किसी भी प्रस्ताव को वीटो कर देगा. उधर पश्चिमी देशों के कूटनीतिज्ञ इस कोशिश में लगे हैं कि किसी तरह ये मतदान टल जाए जिससे उन्हें और समय मिल जाए.

अगर सुरक्षा परिषद में फ़लस्तीनियों की कोशिश विफल हो जाती है तो वे बेहतर पर्यवेक्षक के दर्ज़े के लिए महासभा में मतदान की माँग कर सकते हैं. वेटिकन पहले से ही इस हैसियत में है और वहाँ पर कोई वीटो भी संभव नहीं होगा.

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