इतिहास के पन्नों में 24 सितंबर

  • 24 सितंबर 2011

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो 24 सितंबर के दिन इराक़ ने ईरान पर हवाई हमले किए जिसके बाद इराक़-ईरान युद्घ की शुरुआत हुई. इसके अलावा इसी दिन ब्रिटेन के पर्वताराही पहली बार माउंट एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने पर कामयाब हुए थे.

1975: एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहले ब्रितानी

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Image caption क्रिस बोनिंग्टन की अध्यक्षता वाले इस अभियान में कुल 18 पर्वतारोही थे.

डगल हेस्टन और डग स्कॉट एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने वाले पहले ब्रितानी पर्वतारोही बन गए थे. बेस कैंप स्थापित करने के 33 दिनों बाद क्रिस बोनिंग्टन की अगुवाई में ये दोनों दक्षिण-पश्चिम रास्ते से शिखर पर पहुंचे थे.

दक्षिण-पश्चिम के रास्ते से हिमालय के शिखर पर पहुंचना आज भी सबसे कठिन माना जाता है. इससे पहले डगल हेस्टन और डग स्कॉट एवरेस्ट पर पहुंचने में दो बार विफल रहे थे.

ब्रिटेन की महारानी ने इसकी ख़बर मिलते ही उन दोनों को बधाई संदेश भेजा.

स्कॉट और बोनिंग्टन ब्रिटेन के दो सबसे लोकप्रिय पर्वतारोही बन गए और दोनों ने इसके बाद भी सैंकड़ों चोटियों पर अपनी सफलता के झंडे गाड़े.

बोनिंग्टन ने अपने एवरेस्ट के अभियान पर 'एवरेस्ट द हार्ड वे' नाम की एक किताब भी लिखी थी.

डगल हेस्टन की 1977 में एल्प्स पर्वत पर हुई एक दुर्घटना में मौत हो गई थी.

1980: इराक़-ईरान युद्घ शुरू

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Image caption आठ साल तक चलने वाले इस युद्ध ने पूरे मध्य-पूर्व की राजनीति को प्रभावित किया था.

इसी दिन इराक़ी लड़ाकू विमानों ने ईरान पर हवाई हमले किए.

इराक़ी विमानों ने ईरान के खार्ग द्वीप में स्थित कच्चे तेल निर्यात करने वाले एक टर्मिनल को निशाना बनाया.

इससे पहले दोनों देशों के बीच सीमा पर महीनों से चिट-पुट लड़ाई हो रहीं थी.

फ़रवरी 1979 में इस्लामिक क्रांति के बाद जब से अयातुल्लाह ख़ोमैनी ने ईरान की सत्ता संभाली थी तभी से ईरान और इराक़ के बीच संबंध ख़राब हो गए थे और दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहे थे.

शुरू में ऐसा नहीं लग रहा था कि दोनों देशों के बीच लंबा खिंचेगा क्योंकि दोनों देशों की सैन्य शक्ति बहुत ही सीमित थी.

दोनों महाशक्तियों अमरीका तथा तत्कालीन सोवियत संघ ने इस मामले में तटस्थ रहने की घोषणा की थी.

ईरान में राजनीतिक अस्थिरता का फ़ायदा उठाने की कोशिश करते हुए इराक़ अरब खाड़ी पर क़ब्ज़ा करना चाहता था लेकिन जब ईरान ने उसकी बात नहीं सुनी तो सद्दाम हुसैन ने ईरान पर हमला करने का फ़ैसला कर लिया.

इराक़ के बेहतर हथियारों के कारण उसे शुरूआत में सफलता भी मिली लेकिन बाद में ईरान ने ज़ोरदार जवाबी हमला किया और 1984 एंव 1986 के बीच इराक़ के कुछ इलाक़ो पर क़ब्ज़ा करने में भी कामयाब हो गया था.

आख़िर में दोनों देशों ने अगस्त 1988 में युद्घ विराम की घोषणा की. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ आठ साल तक चले इस युद्घ में लगभग चार लाख लोग मारे गए थे और लगभग साढ़े सात लाख लोग घायल हुए थे.

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