'सरकार की नज़र में ख़तरनाक हूँ मैं'

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अमरीकी बुद्धिजीवी और लेखक डेविड बार्समियान ने कहा है कि उन्हें भारत में प्रवेश की अनुमति इसलिए नहीं दी गई क्योंकि वो कश्मीर के बारे में बेबाक राय ज़ाहिर करते रहे हैं.

उन्होंने कहा कि भारत सरकार उन्हें ख़तरनाक आदमी मानती है और भारत में प्रवेश करने की अनुमति न देना भारत सरकार की कमज़ोरी का निशान है न कि उसकी मज़बूती का.

अमरीका पहुँचने के बाद डेविड बार्समियान ने अपना पहला इंटरव्यू बीबीसी हिंदी सेवा को दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत से लौटाए जाने पर उन्हें काफ़ी सदमा लगा है.

बार्समियान धाराप्रवाह हिंदी बोलते हैं और उन्होंने बीबीसी से हिंदी में ही बात की.

बार्समियान को दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुँचते ही शुक्रवार की रात अधिकारियों ने उलटे पाँव अमरीका लौटने पर मजबूर कर दिया था.

'सदमा और अफ़सोस'

अपने घर से टेलीफ़ोन पर बीबीसी से बात करते हुए बार्समियान ने कहा, “सरकार की नज़र में मैं एक ख़तरनाक आदमी हूँ क्योंकि शायद कश्मीर के बारे में मैंने ज़्यादा बोला है. झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसी बग़ावतों के बारे में मैंने अमरीकी लोगों के लिए रिपोर्टिंग की है. इसके अलावा क्या वजह हो सकती है?”

इस घटना पर भारत के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है.

सरकारी अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि डेविड बार्समियान को इसलिए भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई क्योंकि वो पर्यटक वीज़ा पर आकर पत्रकारिता का काम करते थे.

लेकिन फ़िल्मकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता संजय काक और कश्मीर में लापता लोगों के परिवार वालों के संगठन एपीडीपी से जुड़े ख़ुर्रम परवेज़ ने कहा है कि डेविड बार्समियान को कश्मीर जाना था, इसलिए सरकार ने उन्हें लौटा दिया.

बार्समियान ने बीबीसी से कहा कि उन्हें इस बात का अफ़सोस है कि भारत सरकार ने उन्हें पहले नहीं बताया कि उन्हें भारत आने के लिए अपना वीज़ा बदलना चाहिए.

प्रखर बुद्धिजीवी

बार्समियान ने कहा, “मैं पिछले 45 बरसों से भारत आता रहा हूँ. भारत में मैं अपने गुरू से सितार सीखता रहा हूँ. लेकिन पहली बार इस तरह मुझे देश में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई.”

डेविड बार्समियान ऑल्टरनेटिव रेडियो चलाते हैं और उन्हें अमरीकी विदेश नीति के कड़े आलोचकों में गिना जाता है.

उन्होंने प्रखर अमरीकी बुद्धिजीवी नोम चोम्स्की के साथ किताबें लिखी हैं जिनका दुनिया की कई भाषाओं में अनुवाद हुआ है.

वो हर हफ़्ते समसामयिक विषयों पर किसी एक प्रमुख शख़्सियत से इंटरव्यू करते हैं जिसे उनकी वेबसाइट पर जारी किया जाता है.

डेविड बार्समियान छत्तीसगढ़, झारखंड और दूसरे आदिवासी इलाक़ों में चल रहे आंदोलनों के बारे में भी अपनी राय ज़ाहिर करते रहे हैं.

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