इतिहास के पन्नों में 26 सितंबर

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो पाएगें कि सितंबर 26 ही के दिन हाँगकॉंग पर 150 के ब्रितानी शासन को समाप्त कर इसे चीन के हवाले किये जाने पर समझौता हुआ था. कॉंन्कॉर्ड हवाई जहाज़ ने भी इसी दिन रिकॉर्ड तोड़ा था.

1986 : ब्रिटेन और चीन के बीच हाँगकॉंग को लेकर समझौता

Image caption ब्रिटेन के छोड़ने के पहले हाँगकॉंग के स्थानीय लोगों में अपने भविष्य को लेकर काफ़ी चिंता थी.

इसी दिन लंबी चली बातचीत और मोलभाव के बाद साल 1986 में हाँगकॉंग में 150 साल पुराने ब्रितानी शासन का अंत तय हुआ था. चीन और ब्रिटेन के बीच में आखिरकार यह तय हुआ कि 1997 में चीन इस शहर की प्रभुत्व ब्रितानी हाथों से ले लेगा.

इस प्रस्ताव के बाद यह तय हुआ कि चीन जैसे साम्यवादी देश में हाँगकॉंग एक 'पूँजीवाद के एक टापू' की तरह रहेगा. यह भी तय हुआ कि चीन में हाँगकॉंग को स्वायत्ता रहेगी और हाँगकॉंग एक देश में दो विधान के सिद्धांत पर काम करेगा.

हाँगकॉंग के विधान को लेकर चीन और ब्रिटेन में दो साल तक अलग अलग स्तर पर बातचीत के सैकड़ों दौर चले. समझौते के अनुसार

हाँगकॉंग को अपने आंतरिक मामलों को चलाने की आज़ादी होगी. साथ ही अपने सामाजिक, न्यायिक और आर्थिक मामलों को अपने ढंग से चलते रहने की आज़ादी भी हाँगकॉंग को दिया जाना तय हुआ. समझौते के बाद चीन को हाँगकॉंग के विदेश और रक्षा मामलों को अपने हिसाब से चलाने का अधिकार होगा.

ब्रिटेन के छोड़ने के पहले हाँगकॉंग के स्थानीय लोगों में अपने भविष्य को लेकर काफ़ी चिंता थी. ब्रिटेन ने लोगों आश्वस्त किया था कि हाँगकॉंग से जाने के पहले वो यह बात सुनिश्चित करने की कोशिश करेगें.

1973 : कॉंन्कॉर्ड ने गति का रिकॉर्ड तोड़ा

Image caption यूँ तो इस हवाई जहाज़ की यह उड़ान रिकॉर्ड बनाने की नीयत से ही की गई थी लेकिन इसमें कुछ यात्री भी थे

इसी दिन सुपरसौनिक कॉंन्कॉर्ड यात्री हवाई जहाज़ ने अटलांटिक के पर यात्रा को रिकॉर्ड समय में तय किया था. अमरीका की राजधानी वाशिंगटन से उड़े इस हवाई जहाज़ फ़्रांस की राजधानी ने पेरिस तक की यात्रा महज़ 3 घंटा 32 मिनट के समय में पूरी की है.

यह हवाई जहाज़ 1535 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ़्तार से उड़ा था. यूँ तो इस हवाई जहाज़ की यह उड़ान रिकॉर्ड बनाने की नीयत से ही की गई थी लेकिन इसमें कुछ यात्री भी थे.

कॉंन्कॉर्ड जहाज़ दरअसल उन दिनों उत्तरी और दक्षिणी अमरीका के दौरे पर था क्योंकि इसके निर्माता चाहते थे कि हवाई सेवाएं इनके जहाज़ खरीदें.

कॉंन्कॉर्ड ने दरअसल 1976 से अपनी व्यावसायिक यात्राएं शुरू की हैं. साल 2000 की जुलाई तक कॉंन्कॉर्ड का सुरक्षा रिकॉर्ड बहुत ही अच्छा था लेकिन उसके बाद एक फ़्रांस में एक हादसे में इस जहाज़ में यात्रा कर रहे सभी 109 यात्री मारे गए थे. इस हादसे में ज़मीन पर मौजूद कुछ लोग भी मारे गए.

इस हादसे के बाद ब्रिटिश एयरवेस और एयर फ़्रांस ने धीरे धीरे अपने सभी कॉंन्कॉर्ड जहाज़ सेवाओं से हटा लिए क्योंकि इन जहाज़ों का रखरखाव महँगा होता जा रहा था.