'हक़्क़ानी और आईएसआई संबधों पर भारत सही'

एसएम कृष्णा
Image caption एसएम कृष्णा सोमवार को अमरीकी विदेश मंत्री हिलरी क्लिंटन से मुलाकात करेंगे

भारत का कहना है कि पाकिस्तान की गुप्तचर संस्था आईएसआई और हक़्क़ानी नेटवर्क के बीच संबंधों की बात वो बहुत दिनों से करता आ रहा है और उसे ख़ुशी है कि अब अमरीका को भी इसके बारे में समझ में आ रहा है.

भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने न्यूयॉर्क में इस मुद्दे पर बात करते हुए कहा, “मैं समझता हूं कि हम लोग सही साबित हुए हैं क्योंकि हम लोग अमरीका से जो कुछ हक़्क़ानी नेटवर्क और आईएसआई के संबंधों के बारे में कहते रहते थे, अब अमरीकी भी हक़्क़ानी नेटवर्क के बारे में उसी नतीजे पर पहुंचे रहे हैं.”

भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा सोमवार को अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन से मुलाकात करेंगे.

उन्होंने ये भी कहा कि वह अमरीकी विदेश मंत्री के साथ मुलाकात के दौरान भी हक़्क़ानी नेटवर्क और पाकिस्तानी गुप्तचर संस्था आईएसआई के बीच संबंधों के बारे में बात करेंगे.

अमरीकी सेना के वरिष्ठ अधिकारी माईक मलेन ने कुछ दिन पहले ही अमरीकी संसदीय समिति के समक्ष अपने बयान में कहा था की पाकिस्तान की ख़ुफ़िया संस्था आईएसआई अफ़गानिस्तान में हक़्क़ानी नेटवर्क को अमरीकियों पर हमले करने में मदद करती है.

भारत कई सालों से यह कहता रहा था कि अफ़गानिस्तान में चरंपंथियों को भारतीय दूतावास और अन्य ठिकानों पर हमले करने में पाकिस्तानी आईएसआई की मदद भी शामिल होती है.

लेकिन इससे पहले अमरीका ने कभी खुल कर साफ़ शब्दों में पाकिस्तानी आईएसआई के चरमपंथियों को सीधी मदद देने की बात नहीं कही थी.

सुरक्षा परिषद में बदलाव की ज़रुरत

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत का अस्थाई सदस्य बनने की कोशिश के बारे में बात करते हुए कृष्णा ने बदलाव लाए जाने की अहमियत पर ज़ोर दिया.

उनका कहना था, “भारत की सदस्यता का ही सवाल नहीं है. इस समय हालात यह हैं कि करीब एक अरब लोगों को संयुक्त राष्ट्र में उस तरह का प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा जैसा मिलना चाहिए. ”

न्यूयॉर्क में ही भारतीय विदेश मंत्री ने चीन के विदेश मंत्री से मुलाकात भी की थी. लेकिन उनका कहना था कि उन्होंने चीन से संयुक्त राष्ट्र में बदलाव लाए जाने पर चर्चा नहीं की.

इस बारे में चीन द्वारा भारत को सुरक्षा परिषद की अस्थाई सदस्यता पर समर्थन देने के बारे में उनका कहना था कि चीन के साथ भारत के अच्छे संबंध हैं. और अब विश्व की बदलती सच्चाई को देखते हुए उन्हें उम्मीद है कि हर देश को यह समझना होगा और उसी के हिसाब से फ़ैसले लेने होंगे.

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