फ़लस्तीनियों के लिए ऐतिहासिक फ़ैसला

पश्चिमी तट पर फ़लस्तीनी स्वायत्त शासन को मंज़ूरी

इसराइली प्रधानमंत्री और फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन के नेताओं ने वॉशिंगटन में एक समझौते पर दस्तख़त किए जिसके मुताबिक़ पश्चिमी तट पर फ़लस्तीनी स्वायत्त शासन को मंज़ूरी दे दी गई.

यित्ज़ाक राबिन और यासर अराफ़ात ने व्हाइट हाउस में हुए एक समारोह में 400 पन्नों के समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस मौक़े पर तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, मिस्र के हुस्नी मुबारक और जॉर्डन के शाह हुसैन मौजूद थे.

लेकिन सीरिया और लेबनॉन के नेता इस समारोह में नहीं आए. राबिन और अमरीकी राष्ट्रपति ने इन दोनों अरब देशों से अपील की कि वो इसराइल के साथ शांतिवार्ता शुरू करें. बिल क्लिंटन ने इस समझौते को मध्यपूर्व के इतिहास में एक नया अध्याय कहा. इसराइल के विदेश मंत्री शिमोन पेरेज़ ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि जैसे ही ये समझौता लागू किया जाएगा, वैसे ही फ़लस्तीनी लोग हमारे शासन में नहीं रहेंगे.

ब्रिक्स्टन के दंगे

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28 सितंबर 1985 को दक्षिणी लंदन के ब्रिक्स्टन इलाक़े में पुलिस ने एक घर की तलाशी लेते वक़्त एक महिला को गोली मारकर घायल कर दिया जिसके बाद वहाँ दंगे भड़क उठे. पुलिस को एक डकैती के मामले में एक आदमी की तलाश थी.

जैसे ही ये ख़बर फैली कि पुलिस ने उस संदिग्ध व्यक्ति की माँ चैरी ग्रॉस को बिना कोई चेतावनी दिए गोली मारकर घायल कर दिया, स्थानीय पुलिस स्टेशन के बाहर लोगों की भीड़ इकट्ठा होने लगी. लोग पुलिस कार्रवाई से बेहद नाराज़ थे और रात होते ही ये तनाव फूट पड़ा और इलाक़े में हिंसा फैल गई. दंगे क़ाबू करने के लिए तैनात पुलिस वालों पर हमले हुए और कई लोग घायल हो गए.

ब्रिक्स्टन रोड पर खड़ी कारों को आग लगा दी गई और कई दुकानों को लूट लिया गया. स्कॉटलैंड यार्ड ने चैरी ग्रॉस को गोली मारे जाने को एक त्रासदीपूर्ण घटना क़रार दिया.

इस घटना के बाद ब्रिटेन में नस्लवाद और नस्लीय भेदभाव पर एक बार फिर से बहस शुरू हो गई जिसने कई नए क़ानूनों के लिए रास्ता साफ़ किया.

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