इतिहास के पन्नों में 29 सितंबर

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो 29 सितंबर के ही दिन पोप जॉन पॉल द्वितीय ने आयरलैंड में शांति की अपील की थी और और इसी दिन पोप जॉन पॉल प्रथम की रहस्यमय मौत हुई थी.

1979: आयरलैंड में शांति के लिए पोप की अपील

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Image caption पोप ने आयरलैंड में शांति की अपील की.

कैथोलिक ईसाइयों के धार्मिक गुरू पोप जॉन पॉल द्वितीय ने 1979 में आज ही के दिन आयरलैंड के लोगों से हिंसा को त्याग कर शांति के रास्ते पर चलने की अपील की थी.

दक्षिण आयरलैंड के अपने ऐतिहासिक दौरे के दौरान लगभग तीन लाख लोगों को संबोधित करते हुए पोप ने उनसे शांति का संदेश दिया.

एक बहुत ही भावनात्मक भाषण में पोप ने कहा, "मैं अपने घुटनों पर गिरकर आपसे अपील करता हूं कि आप हिंसा का रास्ता छोड़ दें और शांति के रास्ते पर वापस आ जाएं. कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट दोनों के लिए मेरा संदेश शांति और प्यार का है. किसी भी प्रोटेस्टेंट को ये नहीं सोचना चाहिए कि पोप उनका दुश्मन या उनके लिए कोई ख़तरा है."

ये पहला मौक़ा था जब किसी पोप ने आयरलैंड का दौरा किया था.

1978: पोप जॉन पॉल प्रथम का निधन

1978 में 29 सितंबर के ही दिन पोप जॉन पॉल प्रथम की रहस्यमय हालात में मौत हो गई थी. वे केवल 33 दिनों पहले पोप चुने गए थे और बिस्तर पर पढ़ाई करते-करते अचानक दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी.

वे केवल 33 दिनों तक पोप रहे लेकिन इतने कम समय में ही वे काफ़ी लोकप्रिय हो गए थे.

तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने कहा था कि कुछ ही हफ्तों के कार्यकाल में पोप ने अपने चर्च और पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया था.

उनकी मौत को लेकर षडयंत्र रचे जाने की भी कुछ लोग बातें करने लगे और कुछ कैथोलिक संगठनों ने तो उनकी मौत की पूरी छानबीन की मांग करने लगे.

कुछ लोग कहने लगे कि उन्हें ज़हर देकर मार दिया गया है. लेकिन आख़िरकार उनका पोस्टमार्टम नहीं हुआ और ना ही उनकी मौत की कोई जांच हुई.

1960: सोवियत नेता निकिता ख़ुर्श्चेव का संयुक्त राष्ट्र में हंगामा

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Image caption क्रुश्चेव ने एक इस घटना के एक सप्ताह बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा की कार्रवाई के दौरान अपने जूते से मेज़ पर ज़ोर से मारा था.

पूर्व सोवियत संघ के नेता निकिता ख़ुर्श्चेव ने 29 सितंबर 1960 को संयुक्त राष्ट्र महासभा की एक बैठक में हंगामा खड़ा कर दिया था.

उन्होंने दो बार अपनी मेज़ पर कसे के मुक्का मारा और दो बार महासभा की कार्रवाई को बाधित किया.

ख़ुर्श्चेव कांगो में संयुक्त राष्ट्र की सैन्य कार्रवाई का विरोध कर रहे थे.

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव डैग हमर्कसजोल्ड को हटाकर उनकी जगह तीन सदस्यों की एक टीम गठित करने की मांग की थी.

उनका कहना था कि पश्चिमी देश, सोवियत संघ और तटस्थ देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन लोगों को मिलकर संयुक्त राष्ट्र का संचालन करना चाहिए.

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