सीरिया: यूरोपीय देशों ने तुरंत प्रतिबंध की माँग छोड़ी

  • 28 सितंबर 2011
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Image caption सीरिया में पिछले कई महीनों से प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है

यूरोपीय देशों ने सीरिया सरकार के ख़िलाफ़ तुरंत प्रतिबंध लगाने की माँग फ़िलहाल छोड़ दी है. ये देश सीरिया को लेकर संयुक्त राष्ट्र में नए प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं.

इस नए मसौदे में कहा गया है कि प्रतिबंध तभी लगाए जाएँगे अगर प्रदर्शनों के प्रति दमनकारी नीति बंद नहीं होगी. ब्रिटेन, जर्मनी, फ़्रांस और पुर्तगाल मिलकर मसौदा तैयार कर रहे हैं जिसे अमरीका का समर्थन हासिल है.

इस नई नीति का मकसद रूस और चीन का समर्थन हासिल करना है जो पाबंदी लगाए जाने के ख़िलाफ़ हैं.पश्चिमी कूटनयिकों का कहना है कि वे इस हफ़्ते के अंत तक मतदान करवाने की योजना है.

समाचार एजेंसियों के मुताबिक प्रस्ताव के मसौदे में सभी प्रकार की हिंसा बंद किए जाने की माँग की गई है.

मसौदे के अनुसार 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद का ये निश्चय है कि ‘अगर सीरिया ने प्रस्ताव की बातें नहीं मानीं तो उसके ख़िलाफ़ क़दम उठाए जाएँगे जिसमें प्रतिबंध’ भी शामिल है.

पिछले महीने ब्रिटेन, फ़्रांस जर्मनी और पुर्तगाल ने एक मसौदा तैयार किया था जिसमें राष्ट्रपति असद, उनके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के ख़िलाफ़ पाबंदी लगाने का फ़ैसला किया गया था.

लेकिन चीन और रूस ने वीटो करने की धमकी दी है. इसके अलावा भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ़्रीका भी सीरिया पर पाबंदी लगाने के ख़िलाफ़ हैं.

बीबीसी संवाददाता बारब्रा प्लेट का कहना है कि कुछ देशों को डर है कि सीरिया में बाहरी दख़ल से बड़ा संकट खड़ा हो सकता है.

संवाददाता के मुताबिक लीबिया के बाद इन देशों का रुख़ कड़ा हो गया है क्योंकि इन्हें लगता है कि नैटो ने वहाँ संयुक्त राष्ट्र के दिए कार्यक्षेत्र का उल्लंघन किया है.

इस बीच सीरिया में प्रदर्शनों को दबाए जाने का सिलसिला जारी है.संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि इस साल हिंसा में 2700 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

सीरियाई सरकार का कहना है कि वो ‘हथियारबंद गुटों’ से लड़ रही है जिन्हें विदेशी ताक़तों का समर्थन मिला हुआ है.

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