हक़्क़ानी गुट पर फ़ैसला जल्द: हिलेरी

अमरीका ने कहा है कि वो जल्द ही इस बात पर फ़ैसला ले लेगा कि पाकिस्तान आधारित हक़्कानी नेटवर्क को विदेशी चरमपंथी गुट की सूची में शामिल किया जाए या नहीं.

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने बताया है कि इस पर विचार- विमर्श अंतिम दौर में है. उन्होंने कहा है कि अमरीका ने इस गुट के सात नेताओं पर 2008 से प्रतिबंध लगाया हुआ है.

अफ़ग़ानिस्तान में हुए कई बड़े हमलों के लिए हक़्क़ानी नेटवर्क को ज़िम्मेदार ठहराया गया है.अमरीका का आरोप है कि इस महीने काबुल में अमरीकी दूतावास पर हुए हमले में इसी गुट का हाथ है.

हक़्क़ानी गुट को मुख्यत अफ़गान चरमपंथी संगठन माना जाता है लेकिन इसकी जड़ें पाकिस्तान से भी जुड़ी हैं और कयास लगाए जाते रहे हैं कि पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र के भीतर तक इनकी पहुंच है.

अमरीका का आरोप

हक़्क़ानी गुट के नेता जलालुद्दीन हक़्क़ानी अफ़गानिस्तान के पकतिया प्रांत के जादरान कबीले से आते हैं और पाकिस्तानी उत्तरी वज़ीरिस्तान के कबायली इलाक़े में इनकी कई संपत्तियां हैं.

उत्तरी वज़ीरिस्तान से ही ये गुट 1980 के दशक में अफ़गानिस्तान पर नियंत्रण रखने वाले पूर्व सोवियत संघ के ख़िलाफ़ हमले करता था.

कुछ दिन पहले अमरीका के सबसे वरिष्ठ सैनिक अधिकारी माइक मलेन ने पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई पर आरोप लगाया था कि इस हमले में उसने हक़्क़ानी गुट की मदद की थी.

अमरीकी दूतावास पर हुआ हमला 20 घंटों तक चला था और उसमें 25 लोगों की मौत हो गई थी.

पाकिस्तानी सेना ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वो हक़्क़ानी नेटवर्क से संपर्क में है लेकिन वह उसका समर्थन नहीं कर रही.

कुछ दिन पहले पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर जब संयुक्त राष्ट्र की महासभा में पाकिस्तान का नेतृत्व करने पहुँचीं थी तो भी यही मुद्दा छाया रहा था.

हिना रब्बानी खर ने चेतावनी भरे लहज़े में कहा था कि अगर आरोपों का सिलसिला नहीं रुका तो अमरीका आतंकवाद के ख़िलाफ़ चल रहे युद्ध में एक साथी खो सकता है.

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