अवलाकी की मौत अल-क़ायदा के लिए बड़ा झटका: ओबामा

  • 30 सितंबर 2011
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Image caption अनवर अल-अवलाकी की मौत के दावे इससे पहले भी हो चुके हैं

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमरीका में जन्में अल-क़ायदा के संदिग्ध नेता अनवर अल-अवलाकी के यमन में मारे जाने की पुष्टि कर दी है.

ओबामा ने अवलाकी की मौत को अल-क़ायदा के लिए एक बड़ा झटका क़रार दिया है.

उनके मुताबिक़ अवलाकी ने बेगुनाह अमरीकियों को मारने के लिए रची जा रही साज़िश में अहम भूमिका निभाई थी.

इससे पहले यमन और अमरीकी अधिकारियों ने कहा था कि अवलाकी के कारवां को अमरीकी ड्रोन ने शुक्रवार को निशाना बनाया था.

इससे पहले भी उन पर हमले हो चुके हैं लेकिन वो बाल-बाल बच गए थे.

ख़बरों के मुताबिक़ ताज़ा हमले में उनके अलावा तीन और चरमपंथी मारे गए हैं.

इससे पहले यमन के विदेश मंत्रालय ने अवलाकी के मारे जाने की जानकारी दी थी. बाद में एक अमरीकी अधिकारी ने भी अवलाकी के यमन में मारे जाने की पुष्टि की थी.

यमनी मूल के अवलाकी दिसंबर 2007 से ही यमन में छिपते फिर रहे थे.

अमरीका ने कई हमलों में उनकी कथित भूमिका को देखते हुए उन्हें 'ख़ास अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी' कहा था और बताया जा रहा है कि अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें मारने के आदेश व्यक्तिगत तौर पर दिए थे.

यमन के रक्षा मंत्रालय के बयान में सिर्फ़ इतना ही कहा गया कि उनकी 'अपने कुछ साथियों के साथ मौत हो गई.' इसके अलावा मौत का और कोई ब्यौरा नहीं दिया गया था.

मगर क़बायली सूत्रों ने एएफ़पी समाचार एजेंसी को बताया था कि पूर्वी मारिब प्रांत में एक हवाई हमले में अवलाकी मारे गए. वह इलाक़ा अल-क़ायदा के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है.

इसके बाद अमरीकी अधिकारियों ने बताया कि उनके काफ़िले पर अमरीकी सैनिक विमानों और ड्रोनों ने यमन में हिला किया. पहले की ख़बरों में कहा गया था कि ये अभियान राजधानी सना से 140 किलोमीटर पूर्व में पहाड़ियों में चलाया गया था.

अहम ख़बर

सुरक्षा मामलों के बीबीसी संवाददाता गॉर्डन कॉरेरा का कहना है कि अगर इस हत्या की पुष्टि हो जाती है तो ये काफ़ी अहम होगी क्योंकि अवलाकी ने मीडिया के इस्तेमाल के ज़रिए उन लोगों को निशाना बनाया था जो कट्टरपंथ की ओर ज़रा से भी झुके थे.

उनकी मौत की ख़बर उस समय आई है जबकि अमरीका इस बात को लेकर चिंतित है कि यमन के राजनीतिक संकट का अल-क़ायदा चरमपंथियों के विरुद्ध उसकी कार्रवाई की क्षमता पर क्या असर होगा.

राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के विरुद्ध व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं जबकि कई जगहों पर सेना की टुकड़ियों और क़बायली लडा़कुओं ने उनके विरुद्ध हथियार उठा रखे हैं.

अवलाकी को अमरीका ने अरब प्रायद्वीप में अल-क़ायदा का एक अहम नेता बताया था.

हमलों के आरोप

उन पर टेक्सस में फ़ोर्ट हुड में अमरीकी सैनिक ठिकाने पर हुए हमले, 2009 में डेट्रॉयट में एक विमान को बम से उड़ाने की कोशिश और न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वॉयर में हमले की विफल कोशिश के आरोप हैं.

वह 1990 के दशक में जब सैन डिएगो की एक मस्जिद के इमाम थे तब उनके ख़ुतबे में ख़ालिद अल-मीधर और नवाफ़ अल-हाज़मी मौजूद होते थे जो आगे चलकर 11 सितंबर के हमलावर बने.

पिछले साल उन्होंने एक वीडियो जारी करके अमरीकियों को मारने की अपील की थी और कहा था वे 'शैतान के दल' का हिस्सा हैं.

उसके कुछ ही हफ़्तों बाद वह शाबवा प्रांत में एक हवाई हमले में बाल-बाल बचे थे जहाँ 30 चरमपंथी मारे गए थे.

वैसे इससे पहले दिसंबर 2009 और नवंबर 2010 में दक्षिणी यमन में अमरीकी हवाई हमले में भी उनके मारे जाने की ख़बर आ चुकी है.

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