बर्मा में विवादित बांध का निर्माण रुका

  • 30 सितंबर 2011
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Image caption आंग सान सू ची भी बांध का विरोध कर रही थीं

बर्मा के राष्ट्रपति ने चीन के सहयोग से बन रहे विवादास्पद बाँध का निर्माण रोक दिया है. पनबिजली परियोजना के तहत इस बांध का निर्माण किया जा रहा था.

संसद में शुक्रवार को पढ़े गए एक पत्र में राष्ट्रपति थान साएन ने कहा है कि माइतसोन में 3.6 अरब डॉलर (लगभग 172 अरब रुपए) की लागत से बन रहे बांध का लोग और सांसद विरोध कर रहे थे.

लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सांग सू ची ने हाल ही में बांध का विरोध कर रहे लोगों का समर्थन किया था.

बैंकॉक में बीबीसी की संवाददाता राचेल हार्वे का कहना है कि बांध के निर्माण को रोके जाने को सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की दुर्लभ जीत के रूप में देखा जा रहा है.

इस निर्णय को बर्मा के राजनीतिक नेतृत्व की ओर से जनता की स्वीकार्यता हासिल करने की कोशिशों के रूप में देखा जा रहा है.

गत मार्च में ही सेना ने आंशिक रुप में सत्ता राजनीतिक समाज को सौंपा है.

हज़ारों का विस्थापन

माइतसोन बांध का निर्माण बर्मा और चीन मिलकर कर रहे थे.

इरॉवोदी नदी पर बन रहे ये बांध उस इलाक़े में है जहाँ सेना और जातीय अल्पसंख्यकों के बीच संघर्ष चल रहा है.

अभी इस बांध को बनने में कई वर्षों का समय लगना था लेकिन ये दुनिया का 15वाँ सबसे बड़ा बांध होता जिसकी ऊंचाई 152 मीटर तय की गई थी.

इस बांध के विरोध के लिए बर्मा सरकार के राजनीतिक विरोधियों के अलावा संरक्षण कार्यकर्ता और पर्यावरणवादी साथ आ गए थे.

संवाददाता का कहना है कि इसका विरोध कर रहे लोग इससे होने वाले पर्यावरणीय नुक़सान को लेकर चिंतित थे क्योंकि इसके जलभराव से सिंगापुर के बराबर का इलाक़ा डूब में आने वाला है और इसकी वजह से अल्पसंख्यकों के बहुत से गाँवों से हज़ारों लोगों को विस्थापित करना पड़ेगा.

हालांकि राष्ट्रपति ने इसका निर्माण रोकने की घोषणा की है कि लेकिन कार्यकर्ता इससे ख़ुश नहीं हैं क्योंकि राष्ट्रपति ने कहा है कि वे अपने कार्यकाल तक ही इसका निर्माण रोक रहे हैं.

कुछ लोगों का मानना है कि ये निर्णय अनपेक्षित सा है.

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