इतिहास के पन्नों में - तीन अक्तूबर

  • 3 अक्तूबर 2011

इतिहास में झांके तो इसी दिन जहां पोलैंड की सेना ने वरसॉ में जर्मनी के आगे आत्मसमर्पण किया था, वहीं ब्रिटेन में चाय के वितरण पर से नियंत्रण हटा लिया गया था.

1944: पोलैंड के सैनिकों ने जर्मनी के समक्ष आत्मसमर्पण किया

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Image caption इस लड़ाई में पोलैंड की सेना ने अपने सभी संसाधन दाव पर लगा दिए थे.

पोलैंड की सेना का वारसॉ को आज़ाद कराने के लिए जारी संघर्ष के दौरान इसी दिन 1944 में जर्मनी की सेना ने खदेड़ दिया था.

ये लड़ाई 1944 में एक अगस्त के दिन शुरू हुई थी जब सोवियत संघ की सेना पोलैंड की राजधानी वरसॉ में प्रवेश कर गई थी.

द्वितीय विश्वयुद्ध के शुरू होने पर वारसॉ पहली यूरोपीय राजधानी थी जिस पर पांच साल पहले जर्मनी का कब्ज़ा हो गया था.

पोलैंड से मिली रिपोर्ट के मुताबिक़ लड़ाई के लिए इस समय का चुनाव काफ़ी सोच-समझकर किया गया था क्योंकि जर्मनी युद्ध में अपनी स्थितियों की वजह से वारसॉ पर अपना नियंत्रण छोड़ने के बारे में सोच रहा था.

लेकिन 63 दिनों के संघर्ष के बाद पोलैंड की सेना ने जर्मनी के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया.

एक अनुमान के मुताबिक़ इस लड़ाई में पोलैंड के 2,000 और जर्मनी के 500 लोग मारे गए थे.

पोलैंड की सेना के कमांडर कर्नल मोंटेर ने अपने संदेश में कहा, “लड़ाई के लिए हथियार और लोगों के लिए खाद्य पदार्थों के ख़त्म हो जाने की वजह से हमें अपनी बहादुरी से भरे संघर्ष को वापस लेना होगा.”

1952: चाय वितरण पर नियंत्रण ख़त्म

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Image caption चाय ब्रतानी लोगों की पसंदीदा पेय पदार्थों में से एक है.

ब्रिटेन में इसी दिन 12 साल में पहली बार चाय के वितरण पर से नियंत्रण हटा लिया गया था.

देश को संबोधित करते हुए खाद्य मंत्री ग्विलिम लोएड ज्यॉर्ज ने कहा कि चाय की बिक्री और उसके दाम पर लगा नियंत्रण हटा लिया जाएगा.

उस समय में ब्रिटेन और आयरलैंड विश्व में सबसे ज़्यादा चाय की खपत करने वाले क्षेत्रों में से थे.

ज़ाहिर है कि लोगों के पसंदीदा पेय पदार्थ को सस्ता करने के इस फ़ैसले से लोगों का दिल जीतने की कोशिश की गई थी.

1940 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान चाय के वितरण पर सरकारी नियंत्रण लगा हुआ था.

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