अफ़ग़ानिस्तान ने पाकिस्तान पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया

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Image caption देश के नाम संदेश देते हुए करज़ई

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने पाकिस्तान पर चरमपंथ से लड़ने के नाम पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया है. करज़ई ने कहा कि पाकिस्तान ने सुरक्षा के मामले में उनके साथ सहयोग नहीं किया जिसने उनको काफ़ी निराश किया.

लेकिन हामदि करज़ई ने ये भी कहा कि पाकिस्तान से बातचीत जारी रहनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि वो जल्द ही लोया जिर्गा बुलाएंगे. लोया जिर्गा अफ़ग़ानिस्तान के वरिष्ठ क़बायली सरदारों का एक सामूहिक संगठन है.

सोमवार को राष्ट्रीय टेलीविज़न पर अपना संदेश देते हुए करज़ई ने कहा कि पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान ऐसे भाई हैं जो कभी अलग नहीं हो सकते.

लेकिन उन्होंने साथ ही ये भी कहा, ''तमाम बर्बादी, आपदाओं और परेशानियों के बावजूद जो हमने और पाकिस्तान ने देख़े हैं, दोहरी नीति का खेल और आतंकवाद को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करना जारी रहा.''

उन्होंने आगे कहा, ''पाकिस्तानी सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान में शांति और सुरक्षा क़ायम करने के लिए हमारे साथ सहयोग नहीं किया, जो हमारे लिए बहुत निराशाजनक है.''

उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान की जनता के लिए शांति एक पवित्र आशा है लेकिन ये भी निश्चित किया जाना चाहिए कि उन्हें किसके साथ शांति स्थापित करनी है.

सरकारों से मुक़ाबला

करज़ई ने आगे कहा, ''सच्चाई ये है कि हमारा मुक़ाबला सरकारों के साथ है, उन शक्तियों के साथ नहीं जो सरकारों पर निर्भर हैं. इसलिए हमें सीधे तौर पर उनलोगों से बातचीत करनी चाहिए जिनके पास असल अधिकार है.''

बीबीसी के काबुल स्थित संवाददाता पॉल वुड का कहना है कि करज़ई का बयान पाकिस्तान की तरफ़ इशारा करता है जिसे करज़ई अपने देश में ज़्यादातर समस्याओं के लिए ज़िम्मेदार मानते हैं.

उन्होंने नैटो पर भी हमला करते हुए कहा, ''नैटो ग़लत देश में ग़लत लड़ाई लड़ रही है, आतंकवाद यहां नहीं है.''

इससे पहले अफ़ग़ान चरमपंथी संगठन हक़्क़ानी नेटवर्क के एक प्रमुख नेता ने बीबीसी को बताया कि पूर्व राष्ट्रपति बुर्हानुद्दीन रब्बानी की हत्या के लिए उनका संगठन ज़िम्मेदार नहीं है.

सिराज हक़्क़ानी ने बीबीसी के पश्तो सेवा को बताया कि उनका पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी से कोई लेना देना नहीं है.

पाकिस्तान ने भी रब्बानी की हत्या में शामिल होने के आरोप पर तीव्र प्रतिक्रिया दी है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, ''इस तरह के ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयान देने के बजाए अफ़ग़ानिस्तान के नेताओं को गंभीरता से ये सोचना चाहिए कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति बहाल करने की कोशिश करने वाले और पाकिस्तान की तरफ़ झुकाव रखने वाले अफ़ग़ान नेताओं को क्यों निशाना बनाया जा रहा है.''

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