इतिहास के पन्नों से - 5 अक्तूबर

  • 5 अक्तूबर 2011

इतिहास के पन्ने पलटें तो पाँच अक्तूबर का दिन कई वजहों से याद किया जाएगा. वर्ष 2000 में इसी दिन सर्बिया से विपक्षी समर्थक जुटे और बेल्ग्रेड में युगोस्लाव की संसद का घेराव किया. स्विट्ज़रलैंड की पुलिस ने पाँच अक्तूबर 1994 को एक पंथ के 48 सदस्यों के शव बरामद किए.

2000: युगोस्लाव संसद पर प्रदर्शनकारियों का हमला

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Image caption वर्ष 2006 में युगोस्लाव के राष्ट्रपति मेलोसेविच की मौत हो गई.

पाँच अक्तूबर के दिन सर्बिया से विपक्षी समर्थक जुटे और बेल्ग्रेड में युगोस्लाव संसद का घेराव किया. वे वोजिस्लाव कोस्तुनिका को नया राष्ट्रपति बनाए जाने की मांग कर रहे थे.

प्रदर्शनकारियों ने तत्कालीन राष्ट्रपति मेलोसेविच का समर्थक माने जाने वाले रेडियो टेलिविज़न सर्बिया के मुख्यालय पर भी हमला किया और आग लगा दी.

अब तक शांतिप्रिय रही इस क्रांति में चार अक्तूबर के दिन भी राष्ट्रपति मेलोसेविच के विरोध में एक प्रदर्शन ही निकाला जाना था.

लेकिन सरकारी रेडियो ने सुबह घोषणा की कि एक अदालत ने पिछले महीने के राष्ट्रपति पद के चुनाव को रद्द कर दिया है, जिसका मतलब ये था कि राष्ट्रपति मिलोसेविच अपने पद पर बने रहेंगे.

इसके बाद संसद के बाहर हिंसा भड़क उठी. आख़िरकार अगले दिन यानि पांच अक्तूबर को राष्ट्रपति स्लोबोडान मिलोसेविच ने देश को टेलिविज़न पर दिखाए गए एक संदेश के ज़रिए अपना पद त्यागने का फैसला सुनाया.

बाद में राष्ट्रपति मेलोसेविच पर कोसोवो, क्रोएशिया और बोस्निया में युद्ध अपराधों के लिए मुकदमा चलाया गया.

1994: पंथ के सदस्यों ने की 'सामूहिक आत्महत्या'

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Image caption ये पंथ दुनिया में विनाशकारी हथियारों के संचय के ख़िलाफ था.

स्विट्ज़रलैंड की पुलिस ने पाँच अक्तूबर 1994 को एक पंथ के 48 सदस्यों के शव बरामद किए. इनमें से 23 जेनेवा शहर के पास एक गांव चियरी में एक घर के छुपे हुए हिस्से में मिले.

25 शव जेनेवा से क़रीब 50 मील दूर, इटली की सीमा के पास तीन बंगलों में मिले. इनमें से कई के चेहरों पर प्लास्टिक बैग थे और शरीर पर गोलियों के निशान.

इन सभी मौतों को वर्ष 1984 में डॉ लूक जूरेट और जोसेफ डी मैम्बरो के द्वारा बनाए गए 'ऑर्डर ऑफ द सोलर टेम्पल पंथ' से जोड़ा गया.

'ऑर्डर ऑफ द सोलर टेम्पल पंथ' दुनिया को ख़त्म करने की मंशा से विनाशकारी हथियारों के जुटाए जाने के विरोध में बनाया गया था.

इस घटना के बाद हुई जांच में पता चला कि इस पंथ के पास स्विट्ज़रलैंड, कैनेडा और फ्रांस में काफी ज़मीन और जायदाद थी. ये पंथ पैसों की हेराफेरी और हथियारों की तस्करी भी करता था.

पंथ के संस्थापकों, लूक जूरेट और जोसेफ डी मैम्बरो के ख़िलाफ सामूहिक हत्या के आरोप के अंतर्राष्ट्रीय वारंट जारी किए गए लेकिन बाद में दोनों के शव स्विट्ज़रलैंड में ही पाए गए.

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