कुछ दिनों में सत्ता छोड़ दूँगा: सालेह

अली अब्दुल्लाह सालेह

यमन के राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह ने कहा है कि वो आने वाले दिनों में सत्ता छोड़ देंगे. पहले भी कई बार ऐसा प्रतीत हुआ है कि राष्ट्रपति सालेह पद छोड़ने के लिए तैयार हैं लेकिन आख़िरी मौके पर वे पीछे हटते रहे हैं.

सालेह अचानक ही पिछले महीने सऊदी अरब से यमन वापस आए. जून में उनके कार्यालय पर हुई गोलीबारी में सालेह घायल हो गए थे और इलाज करवाने सऊदी अरब चले गए थे.

खाड़ी देशों की मध्यस्थता के बाद हुए समझौते पर हस्ताक्षर करने से सालेह बार-बार इनकार करते रहे हैं. मार्च में सामने रखे गए प्रस्ताव में कहा गया था कि वे उपराष्ट्रपति को सत्ता सौंप दें और इसके बदले में उनके ख़िलाफ़ मुक़दमे नहीं चलाए जाएँगे.

लेकिन अब यमन के उप सूचना मंत्री ने बीबीसी को बताया है कि सालेह सत्ता में बने रहना नहीं चाहते. सरकारी टीवी पर आए सालेह के भाषण में उन्होंने पद छोड़ने की कोई निश्चित तारीख़ नहीं दी.

उनका कहना था, “मैं सत्ता को नकारता हूँ, मैं आने वाले दिनों में पद छोड़ दूँगा. कई ऐसे निष्ठावान लोग हैं, चाहे वे सेना के हों या बाहर के, जो यमन को चला सकते हैं.”

ख़तरे

हालांकि भाषण से ऐसा नहीं लगा कि राष्ट्रपति सालेह ने खाड़ी देशों की मध्यस्तता वाले समझौते की बात की है.

सितंबर में यमन लौटने के बाद अपनी पहली इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि अगर उनके प्रतिदंद्वियों को चुनाव में लड़ने की अनुमित दी गई तो वे सत्ता नहीं छोड़ेंगे.

इस साल जनवरी से ही राजधनी सना में प्रदर्शनकारी प्रदर्शन करते रहे हैं कि राष्ट्रपति सालेह का शासन ख़त्म होना चाहिए.

यमन की सामाजिक कार्यकर्ता और नोबेल पुरस्कार विजेता तवाकुल कारमन का कहना है कि सालेह की बात का भरोसा नहीं किया जा सकता.

यमन कई सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है जिसमें विभिन्न राजनीतिक गुटों के बीच संघर्ष और अल क़ायदा की गतिविधियों से ख़तरा शामिल है.

चिंता जताई जा रही है कि अल क़ायदा से जुड़े इस्लामिक चरमपंथी यमन में जारी गतिरोध का फ़ायदा उठा हमले तेज़ कर सकते हैं. यमन में गृह युद्ध छिड़ने की आशंका भी जताई जा रही है.

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