मिस्र के घटनाक्रम से ओबामा चिंतित

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Image caption रविवार को कॉप्टिक ईसाई और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें हुई थीं

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि मिस्र में कॉप्टिक ईसाइयों और सुरक्षाबलों के बीच हुई हिंसा में 24 लोगों के मारे जाने से वे काफ़ी चिंतित हैं.

व्हाइट हाउस के एक बयान में कॉप्टिक ईसाइयों की रक्षा किए जाने और चुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार करवाने की बात कही गई है.

इस बीच मिस्र में रविवार को मारे गए प्रदर्शनकारियों के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए हज़ारों कॉप्टिक ईसाई इकट्ठा हुए हैं.

मिस्र की सत्ताधारी सैन्य परिषद ने घटना की जल्द जाँच का आदेश दिया है. वहीं चर्च नेताओं ने कहा है कि रविवार की हिंसा के लिए ‘घुसपैठिए’ ज़िम्मेदार हैं.

अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय का आरोप है कि कट्टरपंथी मुसलमानों के हमलों से उन्हें बचाने के लिए सुरक्षाबलों ने पर्याप्त क़दम नहीं उठाए हैं.

हिंसा

रविवार को हुई हिंसा के बाद सोमवार को भी ग़ुस्साए लोगों की भीड़ सड़कों पर उतरी. अंतिम संस्कार में शामिल होने आए लोग सेना, ख़ासकर सैन्य परिषद के प्रमुख फ़ील्ड मार्शल मोहम्मद तंतावी से ख़ासे नाराज़ नज़र आए.

कॉप्टिक ईसाई मिस्र में जनसंख्या का 10 फ़ीसदी हैं. रविवार को हिंसा उस समय भड़की जब ईसाई समुदाय समेत अन्य लोग काहिरा में प्रदर्शन कर रहे थे.

उनका कहना था कि शुक्रवार को असवान प्रांत में एक चर्च को नष्ट करने में कट्टरपंथ मुसलमानों का भी हाथ है और ये लोग माँग कर रहे थे कि क्षेत्रीय गवर्नर को हटाया जाए.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प से पहले सादी वर्दी पहने कुछ लोगों ने उन पर हमला किया था.

हिंसा सरकारी टीवी की इमारत के बाहर शुरु हुई और तहरीर स्कवेयर तक फैल गई.

मई में कॉप्टिक गिरिजाघरों पर हुए हमलों में 12 लोग मारे गए थे. जबकि मार्च में मुसलमानों और कॉप्टिक ईसाइयों के बीच झड़पों में तहरीर सक्वेयर पर 13 लोग मारे गए थे.

28 नवंबर को मिस्र में संसदीय चुनाव होने वाले हैं. सैन्य परिषद ने कहा है कि अगले महीने चुनाव तय समय पर होंगे.

होस्नी मुबारक के जाने के बाद शासन का ज़िम्मा सैन्य परिषद को दिया गया है. चुनाव होने तक सत्ता अस्थाई रूप से परिषद के पास है.

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