इतिहास के पन्नों में 12 अक्तूबर

इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो 12 अक्तूबर के दिन अदन की खाड़ी में मौजूद अमरीकी नौसेना के युद्ध वाहक पोत यूएसएस कोल पर चरमपंथी हमले हुए थे. इसके अलावा इंडोनेशिया के बाली द्वीप में स्थित एक नाईटक्लब में भीषण बम धमाके भी इसी दिन हुए थे.

2000: यूएसएस कोल पर आत्मघाती हमला

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Image caption इस हमले के पिछे अल-क़ायदा के हाथ होने का शक जताया गया था.

वर्ष 2000 में 12 अक्तूबर के दिन अदन की खाड़ी में तैनात अमरीकी नौसेना के युद्ध वाहक पोत यूएसएस कोल पर हुए एक आत्मघाती हमले में 17 अमरीकी सैनिक मारे गए थे और 40 घायल हो गए थे.

इस हमले के लिए ज़िम्मेदार ठहराए गए लोगों में यमन के दो नागरिक इब्राहिम अल-थौर और अब्दुल्लाह अल-मिसावा शामिल थे.

इस मामले में हमले की साज़िश रचने में मदद करने के आरोप में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था.

हमले की साज़िश रचने के कथित मुखिया सऊदी नागरिक अब्दुल रहीम अल-नशीरी को गिरफ़्तार करने के बाद अमरीका के हवाले कर दिया गया था.

अमरीकी अदालत ने नशीरी और एक अन्य अभियुक्त जमाल मोहम्मद अल-बदावी को मौत की सज़ा सुनाई थी. बाद में जमाल की मौत की सज़ा को बदल कर 15 साल जेल की सज़ाकर दी गई थी.

बाक़ी चार लोगों को यमन की अदालत ने पांच से दस साल की सज़ा सुनाई थी.

ख़बरों के मुताबिक़ नशीरी खाड़ी के इलाक़े में अल-क़ायदा प्रमुख थे.

केन्या और तंज़ानिया स्थित अमरीकी दूतावास में 1998 मे हुए बम धमाके में भी नशीरी के शामिल होने की संभावना व्यक्त की गई थी.

यूएसएस कोल को हमले के दो सप्ताह बाद अदन की खाड़ी से हटा दिया गया था. बाद में इसे ठीक कर लिया गया और उसे अमरीकी नौसैनिक बेड़ें में दोबारा शामिल कर लिया गया.

2002: बाली नाईट कल्ब में बम धमाके

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Image caption इन तीनों को मौत की सज़ा दी गई थी.

इंडोनेशिया के बाली द्वीप में स्थित नाईट कल्ब में हुए भीषण बम धमाके में 202 लोग मारे गए थे. मरने वालों में ज़्यादातर ऑस्ट्रेलियाई नागरिक थे.

मरने वालों और घायलों में कुल 24 देशों के पर्यटक शामिल थे.

एक दूसरा धमाका अमरीकी वाणिज्य दूतावास के पास भी हुआ लेकिन उसमें किसी की मौत नहीं हुई थी.

इंडोनेशिया में सक्रिय एक चरमपंथी संगठन जेमा इस्लामिया को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया था.

जेमा इस्लामिया का कथित तौर पर अल-क़ायदा से संबंध है.

इस हमले के लिए तीन लोगों अमरोज़ी बिन नुरहाशिम, उनके भाई मुख़लास और इमाम समुद्र को मौत की सज़ा सुनाई गई थी.

जबकि अली इमरोन को आजीवन कारावास की सज़ा दी गई थी.

उनके अलावा एक दर्जन से भी ज़्यादा लोगों को साज़िश रचने का दोषी क़रार देते हुए कई वर्षों की सज़ा सुनाई गई थी.

2005 में बाली को एक बार और निशाना बनाया गया था जब तीन आत्मघाती हमलावरों ने ख़ुद को उड़ा लिया था. इस धमाके में 19 लोग मारे गए थे.

इस हमले के लिए भी जेमा इस्लामिया को ज़िम्मेदार ठहराया गया था.

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