बम निर्दोष मुसलमानों की जान बचाने का पवित्र हथियार: अब्दुलमुतल्लब

  • 13 अक्तूबर 2011
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Image caption 24 वर्षीय अब्दुलमुतल्लब नाइजीरिया में जन्मे थे

अमरीका में क्रिसमस के दिन 25 दिसंबर 2009 को डीट्रॉयट शहर के ऊपर एक विमान में विस्फोट करने की कोशिश के आरोपों का सामना कर रहे उमर फ़ारुक़ अब्दुलमुतल्लब अपने ख़िलाफ़ लगे सभी आठ आरोप स्वीकार कर लिया हैं.

इस मामले ने नाटकीय मोड़ तब लिया जब अदालत में जज के समक्ष 24 वर्षीय अब्दुलमुतल्लब ने आतंकवाद और हत्या के प्रयास का 'दोषी' होने का बयान दिया.

नाइजीरिया में जन्मे अब्दुलमुतल्लब ने सुनवाई के दूसरे दिन अदालत में कहा कि 'मुसलमानों पर अमरीका ने जो हमले किए हैं उसके जवाब में ये बम निर्दोष मुसलमानों की जान बचाने का पवित्र हथियार था.'

अब्दुलमुतल्लब ने अदालत में कहा, "अमरीका को इस चेतावनी पर ग़ौर करना चाहिए कि यदि वह निर्दोष मुसलमानों की हत्याएँ जारी रखता है या उन लोगों को मदद देता है जो निर्दोष मुसलमानों की हत्या करते हैं तो अमरीका में भीषण त्रासदी हो सकती है...या फिर ख़ुदा सीधे कार्रवाई करेगा."

उन पर अब जो आठ आरोप लगाए गए हैं उन के तहत उन्हें आजीवन कारावास तक की सज़ा हो सकता है. उन्हें सज़ा 12 जनवरी को सुनाई जाएगी.

अवलाकी से मिलने का आरोप

वो 25 दिसंबर 2009 को नाइजीरिया से एम्सटर्डम गए थे जहाँ से वे डीट्रॉयट के लिए नॉर्थवेस्ट एयरलाइंस की उड़ान 253 में चढ़े. इस विमान में 279 यात्री और चालक दल के 11 सदस्य थे.

सरकारी वकीलों के मुताबिक जब उनके कपड़ों से बंधा बम फटा तो अब्दुलमुतल्लब बुरी तरह से जल गए लेकिन यात्रियों ने आग को बुझा दिया था.

अमरीका और यमन के अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि वे कट्टरपंथी मौलवी अनवर अल-अवलाकी से यमन में मिले थे और उन्होंने अरब की खाड़ी में अल क़ायदा से ही बम की सामग्री पाई थी.

अरब की खाड़ी में अल क़ायदा ने 25 दिसंबर 2009 के हमले की ज़िम्मेदारी कबूल की थी. अवलाकी पिछले महीने यमन में एक अमरीकी ड्रोन हमले में मारे गए थे.

अमरीका के एटॉर्नी जनरल एरिक होल्डर ने अब्दुलमुतल्लब के दोष स्वीकारने के क़दम का स्वागत किया.

उनका कहना था, "इस मामले में हमारी प्राथमिकता थी कि हम ऐसे व्यक्ति को गिरफ़्तार करें जिसने हमें क्षति पहुँचाने की कोशिश की थी. हम उससे ऐसी जानकारियाँ प्राप्त करें जिन पर कार्रवाई हो सके और फिर हम क़ानून के मुताबिक उसके ख़िलाफ़ मुकदमा चलाएँ. हम आतकंवाद के ख़िलाफ़ अपनी जंग सक्रिय तरीके से जारी रखेंगे और बातों से नहीं, नतीजें से ये कर दिखाएँगे."

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