'अरब क्रांति की क़ीमत 50 अरब डॉलर'

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Image caption हमज़ा अल ख़ैतब सीरिया आंदोलन के नेता

एक नए शोध में कहा गया है कि इस साल उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के देशों में हुई 'अरब क्रांति' के दौरान क़रीब पचास अरब डॉलर का आर्थिक नुक़सान हुआ है.

अंतरराष्ट्रीय कंसल्टेंसी ग्रुप जियोपॉलिसिटी के मुताबिक़ इस क्रांति के दौरान सबसे ज़्यादा नुकसान लीबिया, सीरिया और मिस्र को उठाना पड़ा है, जहां उत्पादन पूरी तरह से थम सा गया था.

तीनों देशों में उत्पादन के रूकने का प्रभाव सरकारी कोष पर पड़ा जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है.

बीबीसी संवाददाता पीटर बाइल्स के मुताबिक़ क्रांति के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह प्रभाव देशों पर पड़े हैं.

हालांकि इससे होने वाले आर्थिक नुक़सान का सटीक आकलन मुश्किल है, लेकिन जिन मुल्कों में आंतरिक अशांति बहुत ज़्यादा थी, वहां आने वाले कुछ समय में बहुत अधिक नुक़सान होगा.

रिपोर्ट में इस मामले में लीबिया का उदाहरण दिया गया है, जहाँ महीनों से लड़ाई जारी है.

लीबिया के विस्थापित

लीबिया में फरवरी महीने से अब तक सात लाख से ज़्यादा लोग देश छोड़कर जा चुके हैं और गैस और तेल क्षेत्रों में उत्पादन के पूरी तरह से रूक जाने के कारण अर्थव्यवस्था को भारी क्षति हुई है.

इस पूरे उथल-पुथल ने देश की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है.

हालांकि ये भी कहा गया है कि कच्चे तेल से संपन्न जो देश विद्रोह को दबाने में सफल रहे हैं उन्हें उसका लाभ होगा.

इस सच से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि 1950 के बाद अरब देशों में घटित होने वाला ये सबसे बड़ा उथल-पुथल है, जिससे इन देशों को मिलने वाली अंतर्राष्ट्रीय मदद में भारी कमी आई है.

ये हालात इन सभी देशों के लिए चेतावनी है, जबतक इस संकट के निपटने के लिए किसी तरह की क्षेत्रीय मदद की व्यवस्था नहीं की गई, तो क्रांति का नतीजा प्रतिकूल होगा.

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