बर्मा को और क़र्ज़ देगा भारत

  • 14 अक्तूबर 2011
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भारत ने बर्मा को खेती और दूसरी विकास परियोजनाओं के लिए 50 करोड़ डॉलर के क़र्ज़ की सुविधा देने की घोषणा की है. दोनों देशों ने व्यापार, सुरक्षा विज्ञान और तकनॉलॉजी के क्षेत्र में परस्पर सहयोग और मज़बूत करने पर रज़ामंदी जताई है.

बर्मा के राष्ट्रपति थेइन सेन ने अपनी भारत यात्रा के दौरान आज प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बातचीत की जिसके बाद दोनों देशों की ओर से एक संयुक्त बयान जारी किया गया.

आम तौर पर बाहरी देशों से आने वाले नेता अपनी यात्रा के दौरान मीडिया को संबोधित करते हैं पर बर्मा के राष्ट्रपति ने ऐसा नहीं किया. उसकी बजाए संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया.

संयुक्त वक्तव्य के मुताबिक़ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बर्मा में जनतांत्रिक व्यवस्था की ओर संक्रमण के लिए राष्ट्रपति सेन को बधाई दी, साथ ही इस “जनतंत्रीकरण की प्रक्रिया को मज़बूत करने के लिए” हर तरह की मदद देने की पेशकश की.

व्यापार सहयोग

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Image caption राष्ट्रपति सेन ने बौद्ध मंदिरों में जाकर प्रार्थना की.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कुछ विशेष विकास परियोजनाओं के लिए बर्मा को 50 करोड़ डॉलर देने की घोषणा की है पर क़र्ज़ के लिए हर परियोजना को अलग से मंज़ूरी लेनी होगी.

साथ ही तय किया गया है कि दोनों देशों की सीमाओं पर व्यापार के लिए और अधिक केंद्र खोले जाएँगे ताकि लोग आसानी से आ जा सकें और व्यापार में बढ़ोत्तरी हो.

गैस और तेल के क्षेत्र में परस्पर सहयोग और बढ़ाने पर भी रज़ामंदी हुई है. बर्मा ने गेल, एस्सार, तेल और प्राकृतिक गैस निगम जैसी भारतीय कंपनियों की ओर से बर्मा में निवेश किए जाने पर ख़ुशी जताई है.

दोनों नेताओं ने भारत और बर्मा के बीच चल रही सड़क परिवहन, बंदरगाह निर्माण और जल परिवहन संबंधी परियोजनाओं पर संतोष ज़ाहिर किया है.

विद्रोही गतिविधियाँ

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Image caption आंग सान सू-ची को राष्ट्रपति सेन ने बातचीत शुरू की थी.

भारत और बर्मा के बीच 1600 किलोमीटर से ज़्यादा लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है जिसका ज़्यादातर हिस्सा पहाड़ी इलाक़े में है और ये घने जंगलों से ढका हुआ है.

भारत अकसर चिंता जताता रहता है कि उसके उत्तर-पूर्वी राज्यों के कुछ विद्रोही संगठन जंगल और पहाड़ों का फ़ायदा उठाकर बर्मा में ट्रेनिंग कैंप चलाते रहते हैं.

इसलिए दोनों देशों ने संकल्प जताया है कि वो अपनी धरती को दूसरे देश के ख़िलाफ़ किसी तरह की विद्रोही गतिविधि के लिए इस्तेमाल नहीं होने देंगे.

दोनों देशों ने एक दूसरे के सुरक्षा बलों के बीच सहयोग और समन्वय को बढ़ाने की बात कही है ताकि “आतंकवाद और विद्रोही गतिविधियों” पर क़ाबू पाया जा सके.

इसके अलावा ख़ुफ़िया सूचनाओं के आदान प्रदान की प्रक्रिया को भी मज़बूत करने की बात कही गई है.