‘एशियाई महिलाओं से जबरन देह-व्यापार’

  • 15 अक्तूबर 2011
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मानव तस्करी के ख़िलाफ़ काम कर रहे संगठनों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया में एशियाई देशों से लाई गई महिलाओं को जबरन देह-व्यापार में धकेला जा रहा और इससे ऑस्ट्रेलिया में यौन-व्यापार तेज़ी से जड़ें जमा रहा है.

संगठनों की ओर से आई यह चेतावनी ऐसे दो मामलों में की गई जांच के बाद सामने आई है.

इस जांच में सामने आया है कि ऑस्ट्रेलिया में मौजूद कई मान्यता प्राप्त वेश्यालय मानव तस्करी करने वाले समूहों के साथ मिल कर काम कर रहे हैं.

सिडनी में मौजूद बीबीसी संवाददाता फ़िल मर्कर के मुताबिक संगठनों का मानना है कि ऑस्ट्रेलियाई पुलिस बेहद कम मामले दर्ज कर रही है और इनमें से भी कम ही लोगों को सज़ा दी जा रही है.

ऑस्ट्रेलिया लाई जाने वाली ये ज़्यादातर महिलाएं एशिया और यूरोप से लाई जा रही हैं. इन महिलाओं को अक्सर नौकरी और कॉलेजों में दाख़िले का झांसा देकर लाया जाता है.

अंतत: ये महिलाएं यौन-व्यापार के लिए मज़बूर की जाती हैं.

यौन-व्यापार के लिए मज़बूर

शहरों में मौजूद ग़ैरक़ानूनी ठिकानों के संबंध में जांच करने वाली एक समिति की सदस्य क्रिस सिएज के मुताबिक, ''शहरों में वेश्यालय खोलने के लिए किसी किस्म की कोई जांच नहीं की जाती. यानी कोई भी व्यक्ति, किसी भी परिस्थिति में अपनी स्थानीय परिषद से संपर्क कर लाइसेंस प्राप्त कर सकता है. तो मु्मकिन है कि आप एक मानव-तस्कर हों या किसी आपराधिक गिरोह के सरगना लेकिन फिर भी साउथ-वेल्स में एक वेश्यालय खोलने से आपको कोई नहीं रोक सकता.''

संगठनों के मुताबिक अवैध रुप से ऑस्ट्रेलिया में लाई गई ये महिलाएं विरोध करने से डरती हैं क्योंकि उन्हें और उनके परिजनों को जान का ख़तरा रहता है.

हालांकि ऑस्ट्रेलिया में यौन आधिकारों के हक़ में बोलने वाली ऑस्ट्रेलियाई सेक्स पार्टी की अध्यक्ष फियोना पैटन के मुताबिक़, ''देह-व्यापार में मानव-तस्करी आम बात नहीं है और इससे बचने के लिए हमारे पास कड़े नियम हैं. हमें इन नियमों का पालन करना होगा लेकिन मैं नहीं मानती कि हमें और क़ड़े नियमों की ज़रूरत है.''

इस बारे में पुख्ता आंकड़े नहीं है कि ऑस्ट्रेलिया में हर साल मानव तस्करी के ज़रिए कितने लोग लाए जाते हैं फिर भी संगठनों के मुताबिक इन मामलों की संख्या कम से कम एक हज़ार है.

अधिकारियों के मुताबिक महिलाओं के अलावा, नौजवानों और बच्चों का भी इस ज़रिए काफ़ी शोषण होता है.

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