मलेशिया में नौकरों की भारी कमी

मलेशिया के एक घर में काम करती हुई महिला इमेज कॉपीरइट Getty
Image caption मलेशिया में नौकरों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार के कारण इंडोनेशिया ने अपने कामगारों को वहा भेजना बंद कर दिया है.

मलेशिया में घरेलू काम-काज करने वाले लोगों की भारी कमी हो गई है.

कम दाम में उपलब्ध होने के कारण यहाँ के हज़ारों घरों में काम-काज और बच्चों की देखभाल का दारोमदार नौकरों पर ही होता है. हालांकि, अब इनकी उपलब्धता खुद ही एक समस्या बन गई है.

साल 2009 में नौकरों के साथ दुर्व्यवहार के कुछ मामलों के बाद इंडोनेशिया ने नौकरों को मलेशिया भेजना बंद कर दिया. मलेशिया में इंडोनेशिया से सबसे अधिक काम करने वाले आते हैं. इस मामले में इंडोनेशिया को मनानें के लिए दोनो देशों के बीच हो रही वार्ता विफल हो गई है और इंडोनेशिया की लगाई हुई पाबंदी बरकरार है.

समस्या

घरों में काम करने वाले कामगारों के शोषण होने की संभावनाएं काफी ज्यादा होती है.

आमतौर पर मलेशिया में नौकर जहा काम करते है उसी परिवार के साथ रहते है और वो भाग ना जाएं इसलिए उनके पासपोर्ट रख लिए जातें है.

इस वजह से घरेलू नौकरों का शोषण जैसी स्थितियों के आने पर बचकर निकलना मुशकिल हो जाता है.

क्वाला लंपुर के एक घर में काम करने वाली सोपीएती को शोषित नौकरों के लिए बने एक आश्रय में हाल ही में लाया गया था. सोपीएती ने कहा कि उसे उसके मालिक रोज़ाना पीटा करते थे और धमकी भी देते थे की भागने की कोशिश करने पर हाथ-पैर तोड़ दिए जाएंगे.

क्वालालंपुर में इंडोनेशिया के दूतावास में शोषण की सैकड़ों शिकायतों के बीच इंडोनेशिया के श्रमिक मामलों के अधिकारी एगस त्रियांटो का कहना है की कामगारों के पास काम करने के लिए ज़रुरी दस्तावेज़ ना होने की सूरत में मदद पहुचाना कठिन हो जाता है.

मलेशिया और इंडोनेशिया के अधिकारियों का कहना है की नई कामगार नीति से स्थिती सुधर जाएगी और नौकर अपने पास पासपोर्ट रख सकेंगे. लेकिन इस समझौते पर दोनों देशों की सहमति हो जाने के बाद भी इंडोनेशिया से कामगारों का आना शुरु नही हो पाया है.