बंदियों की अदला-बदली के बाद जश्न

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Image caption कई फ़लस्तीनी दशकों बाद रिहा हुए हैं

इसराइल के अपने एक सैनिक गिलाद शालित के बदले सैकड़ों फ़लस्तीनी क़ैदियों को रिहा करने के बाद दोनों जगह जश्न का माहौल है. गिलाद शालित पाँच साल बाद स्वदेश लौटे हैं.

प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से मिलने के बाद जब शालित अपने गृहनगर पहुँचे, तो उनका हीरो जैसा स्वागत किया गया.

नेतन्याहू ने जहाँ इसे अपनी नीतियों की जीत बताया है, तो हमास ने नेताओं ने सैकड़ों फ़लस्तीनी क़ैदियों की रिहाई को अपनी नीति की जीत कहा है.

हालाँकि बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि इस रिहाई से व्यापाक शांति वार्ता पर कोई ख़ास नहीं पड़ेगा.

पच्चीस वर्षीय गिलाद शालित ग़ज़ा सीमा से पहले मिस्र पहुँचे, जहाँ उन्होंने सरकारी टेलीविज़न को इंटरव्यू दिया.

बाद में नाराज़ इसराइली अधिकारियों ने इस पर अपनी आपत्ति दर्ज की कि शालित से जबरन ये इंटरव्यू दिलवाया गया. उन्होंने इसे पत्रकारिता के मानदंडों का उल्लंघन बताया.

जश्न

बाद में शालित अपने गृहनगर मित्ज़पे हिला पहुँचे. जहाँ सड़कों के किनारे बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और इसराइल का झंडा लहरा रहे थे.

उनके पिता नोएम ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया कि शालित ठीक हैं, लेकिन उन्हें व्यवस्थित होने में समय लगेगा.

उन्होंने ये भी बताया कि पाँच साल क़ैद के दौरान शुरू में उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ, लेकिन बाद में सब ठीक था.

नोएम शालित ने कहा, "हमारे बेटे का पुनर्जन्म हुआ है. हमने एक लंबी और कठिन यात्रा पूरी की है. हम ख़ुश हैं कि हमारा बेटा वापस आ गया है." गिलाद शालित को जून 2006 में फ़लस्तीनी गुटों ने पकड़ लिया था.

इस बीच इसराइल की ओर से छोड़े गए 477 फ़लस्तीनियों के अपने क्षेत्र में पहुँचने का जम कर जश्न मनाया गया. समझौते के तहत कुल मिलाकर 1027 फ़लस्तीनी क़ैदी छोड़े जाने हैं.

रिहाई

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Image caption गिलाद शालित रिहाई के बाद प्रधानमंत्री नेतन्याहू से मिले

इनमें से तो कुछ फ़लस्तीनी क़ैदी दशकों से बंद थे. कुछ को गंभीर अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए हैं तो कुछ को आत्मघाती हमलों की साज़िश रचने का दोषी पाया गया है.

हमास के नियंत्रण वाले ग़ज़ा में हज़ारों की संख्या में लोग जुटे और रिहा हुए फ़लस्तीनियों का स्वागत किया. ज़्यादातर रिहा हुए फ़लस्तीनी पहले ग़ज़ा पहुँचे.

रिहा हुए कई फ़लस्तीनी पश्चिमी तट भी पहुँचे. फ़लस्तीनी प्रशासन के प्रमुख महमूद अब्बास ने इन क़ैदियों को स्वतंत्रता सेनानी कहा. उन्होंने कहा कि भविष्य में और फ़लस्तीनी क़ैदी रिहा होंगे.

हमास के नेता ख़ालिद मेशाल ने इसे जीत कहा है. उन्होंने कहा, "बलपूर्वक हुई बातचीत के कारण शत्रु क़ीमत चुकाते हैं, हमने इसराइल को हराया है."

लेकिन बीबीसी संवाददाता के मुताबिक़ कई लोग ये मानते हैं कि शालित को रिहा करके हमास अपने तुरुप का पत्ता खेल चुका है.

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