लीबिया की समस्या: सवाल-जवाब

इमेज कॉपीरइट Reuters

लीबिया में कर्नल गद्दाफ़ी के 41 वर्षीय शासन के ख़िलाफ़ आखिर क्यों भड़का और उनके विरोधी क्या चाहते थे? पढ़िए सवाल-जवाब के ज़रिए लीबिया की समस्या पर अर्जित जानकारी.

विद्रोही कर्नल गद्दाफ़ी को क्यों हटाना चाहते थे?

कर्नल गद्दाफ़ी ने वर्ष 1969 में एक सैनिक विद्रोह में लीबिया की सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया था.

उनके शासनकाल को बहुत कठोर माना जाता है. इस दौरान छात्रों को गद्दाफ़ी के राजनीतिक विचारों की ‘ग्रीन बुक’ पढ़ने पर मजबूर किया गया.

राजनीतिक पार्टियों पर रोक लगा दी गई और आलोचकों पर अत्याचार किए गए, हिरासत में रखा गया और कई बार जान से ही मार दिया गया.

पड़ोसी देशों ट्यूनीशिया और मिस्र में आंदोलन छिड़ने के बाद लीबिया में भी विरोध के स्वर तेज़ हुए.

लेकिन कर्नल गद्दाफ़ी की सरकार ने पहले त्रिपली शहर में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ बलप्रयोग किया और फिर विद्रोहियों के कब्ज़े वाले बेंगाज़ी शहर में भी लड़ाई छेड़ दी.

अन्य देशों ने लीबिया में हस्तक्षेप क्यों किया?

क़रीब दस लाख लोगों की आबादी वाले बेंगाज़ी शहर में भयंकर लड़ाई हुई.

फिर समय के साथ कर्नल गद्दाफ़ी के अपने पड़ोसी देशों और पश्चिमी देशों से रिश्ते भी बिगड़ते चले गए थे.

आखिरकार अरब लीग ने संयुक्त राष्ट्र से बेंगाज़ी शहर के नागरिकों को बचाने के लिए हस्तक्षेप करने की गुज़ारिश की.

मार्च में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्ताव पारित किया जिसके तहत बेंगाज़ी शहर के नागरिकों की सुरक्षा और उसे उड़ान-निषिद्ध क्षेत्र बनाने के लिए “सभी ज़रूरी कदम” उठाने को स्वीकृति दी गई.

हालांकि इसमें ज़मीन पर सेना की तैनाती शामिल नहीं थी. इसके बाद नेटो सेना ने विमानों के ज़रिए गद्दाफ़ी सरकार की सेना पर बमबारी शुरू कर दी, जिसकी वजह से उन्हें बेंगाज़ी शहर से पीछे हटना पड़ा.

तो क्या नेटो विद्रोहियों का समर्थन कर रहा था?

नेटो अधिकारियों ने “विद्रोहियों की वायु सेना” होने के दावे का पुरज़ोर खंडन किया है.

उनका कहना है कि वे तो विद्रोहियों के सीधे संपर्क में भी नहीं थे.

लेकिन विद्रोहियों के साथ लड़ाई पर नज़र रख रहे पत्रकारों के मुताबिक अक़्सर नेटो गद्दाफ़ी समर्थक सेना के ऐसे ठिकानों पर बम गिराता था जो विद्रोहियों को आगे बढ़ने में मदद करते थे.

त्रिपली पर कब्ज़ा होने के बाद से ब्रिटेन ने इस बात की पुष्टि की है कि कर्नल गद्दाफ़ी को ढूंढने में नेटो विद्रोहियों को “ख़ुफिया जानकारी” मुहैया करा रहा है.

इससे पहले फ्रांस ने विद्रोहियों को हथियार पहुंचाने की बात मानी थी. अन्य देशों ने विद्रोहियों को प्रशिक्षण की सहायता भी दी है.

विद्रोहियों में ज़्यादातर आम नागरिक हैं. पश्चिम और अरब देशों के नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि वे चाहते हैं कि कर्नल गद्दफ़ी सत्ता छोड़ दें.

इसमें इतना समय क्यों लगा?

नेटो के हवाई हमले शुरू होने के पांच महीने बाद ही विद्रोही त्रिपली शहर में दाख़िल हो पाए.

कर्नल गद्दाफ़ी की सेना में प्रशिक्षित सैनिक थे जबकि विद्रोहियों में ज़्यादातर आम नागरिक थे जिन्होंने किसी तरह एके-47 जैसे हल्के हथियार जुया लिए थे.

हवाई हमले के ज़रिए गद्दाफ़ी की प्रशिक्षित सेना को कमज़ोर करने और उसके सामने विद्रोहियों को एक लड़ाकू दल की तरह खड़ा करने में समय लगा.

आखिरकार विद्रोहियों ने तटवर्ती त्रिपली शहर को तीन दिशाओं से घेर लिया. शहर में दाख़िल होने पर उत्साहित जनता ने उनका स्वागत किया.

संबंधित समाचार