कुछ क्षेत्रों से हट सकते हैं 'सख़्त' क़ानून: उमर

कश्मीर में सैनिक
Image caption मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयान के बाद राजनीतिक हलचल बढ़ी है

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को श्रीनगर में एक सभा को संबोधित करते हुए संकेत दिया कि राज्य में लागू कुछ कड़े क़ानून कुछ क्षेत्रों से हटाए जा सकते हैं.

पर्यवेक्षक उनके बयान को सेना विशेषाधिकार कानून के संदर्भ में देख रही है.

बीबीसी के श्रीनगर संवाददाता रियाज़ मसरूर के अनुसार उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इन कानूनों को हटाने के बारे में फ़ैसला लेना उनके हाथ में नहीं है लेकिन राज्य में कुछ क्षेत्रों में हिंसा में कमी आई है और वहां ऐसे कानूनों की ज़रूरत नहीं है.

उमर अब्दुल्ला का कहना था, "यहां पर सबसे बड़ी शिकायत लोगों की ये रही है कि हालात तो ठीक हुए लेकिन ख़राब हालात की वजह से जो कानून यहां पर लागू किए गए थे, उन कानूनों का हटाने का काम नहीं हुआ. आज मैं बड़ी खु़शी से कहना चाहता हूं शायद वक्त आ गया है और हालात हमें इस बात की इजाज़त दे रहे हैं कि हम रियासत के कुछ इलाकों से उन कानूनों को हटाने का काम कर सकते हैं जिनको चरमपंथ की शुरुआत में यहां लागू किया गया."

माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री का इशारा विवादित सेना विशेषाधिकार कानून (आफ़स्पा) की तरफ़ है.

इस बारे में मुख्यमंत्री ने ट्वीट भी किया है. उनके ट्वीट के अनुसार, "कुछ लोगों के लिए ये कदम बहुत ज़्यादा है, जबकि कुछ के लिए ये काफ़ी नहीं है. मगर मैं मानता हूं कि छोटी ही सही लेकिन ये एक महत्वपूर्ण शुरुआत है."

बारह अक्तूबर को उमर अब्दुल्ला और गृह मंत्री पी चिदंबरम के बीच हुई बैठक में राज्य की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा हुई थी.

इस बैठक के बाद उमर अब्दुल्ला ने मीडिया को बताया था बैठक के दौरान राज्य के कुछ क्षेत्रों में लागू सेना विशेषाधिकार क़ानून, आफ़स्पा, और अशांत क्षेत्र अधिनियम को हटाने के मुद्दे पर चर्चा हुई.

उन्होंने ये भी कहा था कि पहले उन इलाक़ों को चिन्हित करना होगा जिनमें सेना की कम से कम मौजूदगी है. उसके बाद ही अशांत क्षेत्र अधिनियम हटाए जाएंगे, जिसके बाद आफ़्सपा यानि सेना विशेषाधिकार क़ानून वहां से वापस ले लिया जाएगा.

सेना विशेषाधिकार कानून, आफ़स्पा, जुलाई 1990 में जम्मू-कश्मीर में लागू किया गया था.

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