बदलते मध्य पूर्व में शासकों को संदेश

  • 21 अक्तूबर 2011
लीबिया में जश्न इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption गद्दाफ़ी की मौत की ख़बर के बाद त्रिपोली में जश्न सा माहौल देखने को मिला.

मध्य-पूर्व में क्रांतिकारी बदलाव से भरे इस साल में मिस्र के तहरीर चौक के नज़ारे के साथ-साथ कर्नल गद्दाफ़ी का ख़ूनी अंत भी शामिल हो गया है.

तहरीर चौक पर जमा प्रदर्शनकारियों ने तत्कालीन राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को साफ़ संदेश दे दिया था कि उनके जाने का वक़्त आ गया है.

भीड़ को पहले शांत और फिर तितर-बितर करने की कोशिश के बाद मुबारक को यक़ीन हो गया था कि वो हालात पर क़ाबू नहीं पा सकते हैं.

उनकी सेना ने भी मिस्र की निहत्थी जनता पर बल प्रयोग करने से इनकार कर दिया था.

राष्ट्रपति मुबारक ने कुर्सी छोड़ दी और अब भ्रष्टाचार के मामले में अदालत का सामना कर रहें हैं. ये भी एक यादगार नज़ारा है.

आशंका इस बात की है कि होस्नी मुबारक जेल की कोठरी तक पहुंचने से पहले ही घर में नज़रबंदी की हालत में ही दुनिया को अलविदा कह सकते हैं.

मुबारक का पतन और ट्यूनिशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति ज़ैनुल आबिदीन बिन अली के देश छोड़ कर भागने का नज़ारा देखने के बाद कर्नल गद्दाफ़ी ने एक दूसरा रास्ता अपनाने का फ़ैसला कर लिया था.

'बादशाहों के बादशाह' की तस्वीरों से संदेश

मिस्र के विपरीत, गद्दाफ़ी ने अपने ही लोगों के खिलाफ़ सेना का इस्तेमाल किया.

आख़िरकार विद्रोहियों के लगातार हमले के कारण उन्होंने राजधानी त्रिपोली तो छोड़ दी लेकिन लीबिया नहीं छोड़ा.

वो लीबिया में रुक तो गए लेकिन उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ा.

एक समय में अफ़्रीक़ा में 'बादशाहों के बादशाह' कहलाने वाले कर्नल गद्दाफ़ी की मौत की भयानक तस्वीरों ने उन नेताओं को एक कड़ा संदेश दिया है जो बदलाव के लिए अपनी जनता की आवाज़ नहीं सुनते और उनका विरोध करते रहते हैं.

'असद भी ग़ौर फ़रमाएँ'

इस बात का अंदाज़ा तो लगाया ही जा सकता है कि सीरिया के बशर अल-असद भी लीबिया में हो रहे बदलावों को ग़ौर से देख रहें होंगे.

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption दमन के बावजूद सीरिया में प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं.

असद ने साल के शुरु में कहा था कि सीरिया पूरे अरब जगत में हो रहे बदलावों से अछूता है.

लेकिन सीरिया में हालात मिस्र जैसे नहीं होने के बावजूद राष्ट्रपति असद इस पूरे बदलाव से अछूते नहीं रह सकते हैं.

सीरिया में नैटो सेना हस्तक्षेप नहीं करेगी. इसके बावजूद सीरियाई नागरिकों के प्रदर्शन को अत्यधिक बल प्रयोग से कुचलने के कारण सीरिया में भी ख़तरा बढ़ गया है.

उस क्षेत्र के सभी शासकों के लिए खेल के नियम बदल गए हैं.

केवल एक साल पहले तक क्षेत्र के सभी शासक जनता की आकांक्षाओं से बेख़बर अपना अधिकार समझकर वहां शासन कर रहे थे.

लेकिन अब हालात पहले जैसे नहीं है और भविष्य अनिश्चित बना हुआ है. लीबिया में कर्नल गद्दाफ़ी की मौत ने वहां निकट भविष्य को उज्जवल बना दिया है.

इसने विनाशकारी चरमपंथी गतिविधियों की किसी संभावना को भी ख़ारिज कर दिया है.

सिर्त पर नियंत्रण के लिए हुई लड़ाई के दौरान हमने देखा था कि कर्नल गद्दाफ़ी के कुछ समर्थक देश के कुछ इलाक़े में मौजूद थे.

सिर्त के पतन और गद्दाफ़ी की मौत ने लीबिया की राष्ट्रीय अंतरिम परिषद को एक और मौक़ा दिया है कि वो पूरे देश को अपने नेतृत्व में एकजुट करें.

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption देश पर लंबे समय तक शासन करने वाले होसनी मुबारक पर मुक़दमा जारी है.

लेकिन लीबिया के क़बिलाई समाज के स्वरूप को देखते हुए ये कहना तो आसान है लेकिन करना बहुत मुश्किल.

भविष्य की चुनौती

हो सकता है कि गद्दाफ़ी के अंत के बाद लीबिया के प्रमुख राजनीतिक नेता और क़बिलाई नेता कुछ समय के लिए अंतरिम परिषद से सहयोग करें.

लेकिन फ़िलहाल इसकी कोई वजह नहीं दिखती कि लीबिया और उस क्षेत्र के दूसरे देशों में एक समग्र, उदार और प्रजातांत्रिक समाज का गठन होगा जिसका राष्ट्रपति बराक ओबामा ने गुरूवार को ज़िक्र किया था.

गद्दाफ़ी की मौत से पहले ही एनटीसी ने त्रिपोली में गद्दाफ़ी की परिसर की दीवारों को भेद दिया था. वहां कोई ऐसी संस्था नहीं है जो लीबिया को विधिवत रूप से काम कर रही एक सरकार दे पाए.

अफ़ग़ानिस्तान की तुलना में लीबिया के पास धन की कमी नहीं है लेकिन इसके पुनर्गठन के लिए उसे शून्य से शुरूआत करनी होगी.

अंतरराष्ट्रीय जगत भी लीबिया के साथ सहयोग करेगा.

आख़िरकार हाल तक कर्नल गद्दाफ़ी के तमाम पिछले कारनामों को भुलाकर अमरीका और यूरोप के देश उनके साथ मिलजुल कर काम कर रहे थे.

इस क्षेत्र में नए शासक सत्ता हासिल करेंगे इसलिए नहीं कि वे इसके लायक़ हैं बल्कि इसलिए कि वे चुने गए हैं.

इसलिए अमरीका समेत पूरे अंतरराष्ट्रीय जगत को उस फ़ैसले का सम्मान करना चाहिए.

संबंधित समाचार