हक्कानी गुट से अमरीका की मुलाक़ात

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Image caption हिलेरी क्लिंटन ने पाकिस्तान दौरे के दौरान हक़्क़ानी गुट के साथ मुलाक़ात की जानकारी दी

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने बताया है कि कि अमरीकी प्रशासन ने पाकिस्तान और अफग़ानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय चरमपंथी गुट हक्कानी नेटवर्क के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात की है.

हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि ये मुलाकात किस जगह पर हुई और इसमें कौन शामिल थे.

लेकिन एक वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी ने बताया है कि ये मुलाकात गर्मियों के दौरान, अफ़गानिस्तान में अमरीकी हितों को निशाना बनानेवाले हमलों से ठीक पहले हुई थी.

हिलेरी क्लिंटन अभी पाकिस्तान के दौरे पर थीं जहाँ उन्होंने पाकिस्तान सरकार से कहा कि वो हक़्क़ानी गुट के ख़िलाफ़ क़दम उठाए.

उन्होंने वहाँ कहा कि अमरीका ने हक़्क़ानी गुट के साथ ये देखने के लिए एक प्रारंभिक दौर की वार्ता की कि वे इसके लिए आते हैं कि नहीं.

उन्होंने कहा,"दरअसल पाकिस्तानी अधिकारियों ने ये मुलाक़ात करवाने में सहायता की. हमने तालिबान के साथ संपर्क किया, हम हक़्क़ानी नेटवर्क के पास भी गए, ताकि हम ये जान सकें कि वे कितने तत्पर और ईमानदार हैं."

उन्होंने कहा कि अमरीका-पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान अब मिलकर एक रास्ता बनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि औपचारिक रूप से बातचीत हो सके.

अमरीका और हक़्क़ानी गुट के बीच मुलाक़ात की ख़बरें पहले भी आई थीं मगर तब अमरीका ने इनकी पुष्टि करने से मना कर दिया था.

इस्लामाबाद स्थित बीबीसी संवाददाता किम घटास का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में लड़ाई के ख़त्म होने के लिए एक राजनीतिक समझौता होना बहुत ही महत्वपूर्ण होगा.

मुलाक़ात

अमरीका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी अमरीका और हक़्क़ानी नेटवर्क के बीच मुलाक़ात की बात को स्वीकार करते हुए ये मुलाकात पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के अनुरोध पर हुई जिसने अमरीका से उन्हें एक मौक़ा दिए जाने का आग्रह किया था.

ये मुलाक़ात अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों पर हुए दो बड़े हमलों और काबुल में अमरीकी दूतावास पर हुए हमले के बाद हुई.

इन हमलों के लिए हक़्क़ानी नेटवर्क को ज़िम्मेदार ठहराया गया था. अमरीकी सेनाओं के निवर्तमान सेनाध्यक्ष एडमिरल माइक मलन ने सितंबर में हक्कानी गुट को आईएसआई की अभिन्न शाखा बताते हुए आईएसआई पर चरमपंथियों को सीधे-सीधे सहयोग देने का आरोप लगाया था.

हालाँकि पाकिस्तान ने इस आरोप से इनकार किया था. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री युसुफ़ रज़ा गिलानी ने पिछले महीने कहा था कि चरमपंथ से लड़ने के मसले पर पाकिस्तान अमरीका के दबाव में नहीं आएगा.

इससे पूर्व हिलेरी क्लिंटन ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार के साथ मुलाक़ात की थी जिन्होने कहा था कि बेहतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग से और अधिक सफलता हासिल हो सकती है.

अमरीका और पाकिस्तान के संबंध पिछले एक दशक के सबसे ख़राब दौर से गुज़र रहे हैं.

दोनों देशों के बीच कई महीनों के तनाव के बाद हिलेरी क्लिंटन एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल के साथ पाकिस्तान पहुँची हैं, जिसमें उनके साथ सीआईए प्रमुख डेविड पेट्रियस और अमरीकी सेना के नए सेनाध्यक्ष जनरल मार्टिन डेंपसी शामिल हैं.

इससे पूर्व गुरूवार को अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में हिलेरी क्लिंटन ने अमरीका,पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच चरमपंथियों से लड़ने के लिए एक नई साझेदारी की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और चरमपंथियों से शांति का रास्ता अपनाने की अपील की.

उन्होंने वहाँ कहा कि पाकिस्तान का अफ़ग़ान संघर्ष के हल का हिस्सा होना बेहद ज़रूरी है.

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