ट्यूनीशिया में ऐतिहासिक चुनाव, लोगों में उत्साह

  • 23 अक्तूबर 2011
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Image caption चुनाव में महिला उम्मीदवार बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहीं हैं.

अरब देशों में विद्रोह की शुरुआत करने वाले देश ट्यूनीशिया में विद्रोह के बाद पहली बार चुनावों में मतदान शुरु हो गया है और लोग मतदान को लेकर बेहद उत्साहित दिख रहे हैं.

शांतिपूर्ण विद्रोह के ज़रिए पूर्व राष्ट्रपति ज़िनेदिन अल अबेदीन बेन अली के तख्तापलट के नौ महीने के बाद ये चुनाव संविधान सभा के गठन के लिए हो रहे हैं.

संविधान सभा देश के नए संविधान का मसौदा तैयार करेगी. साथ ही संविधान सभा अंतरिम राष्ट्रपति और अंतरिम सरकार को चुनेगी.

देश के 72 लाख वोटर 217 सदस्यीय संविधान सभा को चुनने के लिए अपना मत डालेंगे.

संवाददाताओं का कहना है कि देश में मतदान को लेकर भारी उत्साह का माहौल है और पिछले हफ्ते चुनाव प्रचार के दौरान भी लोगों ने प्रक्रिया में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है.

चुनाव से पहले के रूझान इस्लामी पार्टी एनाहदा की भारी जीत का इशारा कर रहे हैं. ये पार्टी बेन अली के शासनकाल में प्रतिबंधित थी.

वहीं देश की वाम पार्टियां चुनाव से पहले किसी गठबंधन के नहीं बनने से कमज़ोर पड़ गई हैं.

इस चुनाव में 80 पार्टी के करीबन 11000 उम्मीदवार मैदान में है, जिसमें आधी महिलाएं हैं.

चिंगारी

ट्यूनीशिया में एक युवक मोहम्मद बोअज़ीज़ी ने अधिकारियों के विरोध में खुद को आग लगाकर जान दे दी थी जिसके बाद वहां विरोध का दौर शुरु हो गया था.

बोअज़ीज़ी की मां मानोबिया बोअज़ीज़ी ने नेताओं से अपील की है कि वो चुने जाने के बाद उनके बेटे की कुर्बानी को जाया न करें और ग़रीब लोगों की मदद करें.

मानोबिया ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "मुझे अपने बेटे पर गर्व है कि उसने न सिर्फ़ ट्यूनीशिया बल्कि पूरी दुनिया को बदल कर रख दिया. वो पूरी दुनिया का बेटा बन गया है. ख़ुदा का शुक्रिया की ट्यूनीशिया की जीत हुई है, लीबिया और मिस्र की जीत हुई है. वो सभी अरब देश जो बदलाव के लिए लड़ रहे हैं और कुर्बानियां दे रहे हैं, उनकी भी जीत हो."

बदलाव

बेन अली को हटाए जाने के बाद कई दूसरे अरब देशों में भी बदलाव के लिए लोग सड़कों पर उतर आए है.

अरब क्रांति की सबसे नई जीत लीबिया में रही जब गुरुवार कर्नल गद्दाफ़ी को जान से हाथ धोना पड़ा.

इससे पहले मिस्र में लंबे समय से राष्ट्रपति रहे होसनी मुबारक को लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद अपने पद से हटना पड़ा था.

विरोध का दौर सीरिया और यमन में भी देखने को मिला रहा है.

लेकिन इन देशों के विरुद्ध ट्यूनीशिया की क्रांति अधिकतर शांतिपूर्ण ही रही थी.

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