मैं चाहता था गद्दाफ़ी जीवित रहें: कार्यकारी प्रधानमंत्री

  • 23 अक्तूबर 2011
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Image caption जिबरिल के अनुसार वो जानना चाहते थे गद्दाफ़ी ने इतने अत्याचार क्यों किए.

लीबिया के कार्यकारी प्रधानमंत्री महमूद जिबरिल ने बीबीसी से कहा है कि वो चाहते थे कि लीबिया के पूर्व नेता मुअम्मर गद्दाफ़ी जीवित रहें.

बीबीसी के हार्डटाक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री का कहना था, '' मैं जानना चाहता था कि गद्दाफ़ी ने लीबिया के लोगों के साथ जो किया वो क्यों किया.''

कार्यकारी प्रधानमंत्री ने साफ़ कहा, '' मैं ईमानदारी से कहूं तो निजी तौर पर मैं चाहता था कि वो (कर्नल गद्दाफ़ी) जीवित रहें.मैं उनसे उनके 42 वर्ष की तानाशाही के बारे में पूछना चाहता था.''

जिबरिल का कहना था कि वो कर्नल गद्दाफ़ी की मौत की पूरी जांच का स्वागत करेंगे. उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र ने गद्दाफ़ी की मौत की जांच किए जाने की अपील की है.

रविवार को लीबिया के नेता देश की पूरी स्वतंत्रता की घोषणा करने वाले हैं क्योंकि गद्दाफ़ी की मौत के साथ ही सिर्त पर भी अंतरिम परिषद का नियंत्रण हो गया है और पूरी लीबिया अंतरिम परिषद के नियंत्रण में आ गया है.

स्थानीय नेतृत्व पर दबाव है कि कर्नल गद्दाफ़ी की गुरुवार को सिर्त में हुई मौत के बारे में सारे ब्यौरे उपलब्ध कराए जाएं.

अमरीका ने कहा है कि गद्दाफ़ी की मौत की जांच बिल्कुल पारदर्शी ढंग से हो. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त नावी पिल्लै ने भी मामले की पूरी जांच की अपील की है और कई मानवाधिकार गुटों ने भी जांच करने की अपील दोहराई है.

गुरुवार को ही गद्दाफ़ी की मौत की खबरों के दौरान आए एक वीडियो फुटेज में उन्हें जीवित देखा गया था हालांकि अधिकारियों का कहना है कि गोलीबारी में गद्दाफ़ी मारे गए थे.

मौत का ब्यौरा

इस बीच गद्दाफ़ी को पकड़ने वाली सेना के कमांडर ओमरान अल-ओवैब ने उनकी मौत के घटनाक्रम का ब्यौरा दिया है.

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Image caption गद्दाफ़ी के शव को अभी तक दफनाया नहीं गया है.

ओमरान अल-ओवैब ने बीबीसी को बताया कि घायल कर्नल को एक कचरे के पाइप से खींचकर निकाला गया. वह सिर्त में छिपे हुए थे और उस पाइप से निकलने के बाद वह 10 क़दम चलकर गोलीबारी के बीच अचानक गिर गए.

कमांडर के अनुसार ये बताना मुश्किल है कि कर्नल की मौत की वजह बनी गोली किसने चलाई.

इस बीच कर्नल गद्दाफ़ी के पोस्ट मॉर्टम को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है.

उनका और उनके बेटे मुतस्सिम का शव मिसराता शहर में एक माँस रखने वाली जगह पर सुरक्षित रखा गया है.

लीबिया की अंतरिम सरकार चला रहे नेशनल ट्रांज़िशनल काउंसिल यानी एनटीसी के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अहमद गेब्रील ने बीबीसी को बताया कि शनिवार को कर्नल का पोस्ट मॉर्टम हुआ.

मगर एनटीसी के ही एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी नैगी बरकत का कहना था कि पोस्ट मॉर्टम जैसे किसी भी परीक्षण की ज़रूरत ही नहीं है क्योंकि मौत की वजह तो पता चल ही चुकी है.

'ज़िंदा रखने की कोशिश'

बीबीसी को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में ओवैब ने कहा, "मैंने ये नहीं देखा कि किसने मारा या किस हथियार से गद्दाफ़ी मारे गए."

उन्होंने माना कि उनके कुछ लड़ाकू तो गद्दाफ़ी को वहीं पर गोली मार देना चाहते थे मगर उन्होंने गद्दाफ़ी को ज़िंदा रखने की भरसक कोशिश की.

ओवैब ने बताया कि जब गद्दाफ़ी पाइप से निकलकर गिर गए तो वह कर्नल को पास के अस्पताल ले गए जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. उनका कहना था, "मैंने उनकी जान बचाने की कोशिश की मगर मैं ऐसा कर नहीं सका."

उनकी मौत को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं. वीडियो फ़ुटेज से पता चलता है कि उन्हें सड़कों पर घसीटा भी गया था.

अमरीका ने अधिकारियों से सारी बात खुलकर बताने को कहा है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने कहा कि 'जिस तरह उनकी मौत हुई उससे कई सवाल उठते हैं.'

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