ट्यूनीशिया में 90 फ़ीसदी मतदान

  • 24 अक्तूबर 2011
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Image caption चुनाव में हिस्सा लेने वालों की लंबी क़तारें देखी गईं

ट्यूनीशिया में 90 प्रतिशत से भी ज़्यादा पंजीकृत मतदाताओं ने चुनाव में हिस्सा लिया है. अरब मूल के देशों में विद्रोह के बाद वहाँ किसी देश में हो रहा ये पहला चुनाव है.

ट्यूनीशिया में 217 सदस्यों वाली सभा का चुनाव हो रहा है जो आगे संविधान का मसौदा तैयार करेंगे और एक अंतरिम सरकार का चुनाव करेंगे.

पूर्व राष्ट्रपति ज़िने अल-आबिदीन बेन अली को नौ महीने पहले व्यापक विरोध प्रदर्शन के बाद सत्ता छोड़नी पड़ी थी.

माना जा रहा है कि इस्लामी पार्टी एन्नाहदा को सर्वाधिक मत मिलेंगे मगर अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि उन्हें बहुमत मिलेगा या नहीं.

बेन अली 14 जनवरी को ट्यूनीशिया छोड़कर भाग गए थे और किसी अरब मूल के देश में ये पहले बड़े विरोध प्रदर्शन के बाद हुआ था.

ट्यूनीशिया में चुनाव अभियान इस्लामी पार्टियों और धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के बीच मतभेद, पार्टियों को मिले धन और मतदाताओं की उदासीनता से जुड़ी चिंताओं के बीच हुआ है.

चुनाव आयोग के महासचिव बूबकर बेथबेत ने कहा कि कुल 41 लाख मतदाता पंजीकृत थे जिनमें से 90 प्रतिशत से ज़्यादा ने चुनाव में हिस्सा लिया है.

उनके अलावा 31 लाख अन्य मतदाताओं के पास भी मताधिकार था और उनके मतदान की संख्या क्या रही अभी इसका अंदाज़ा नहीं है.

देर शाम तक चला मतदान

मतदान केंद्र स्थानीय समयानुसार शाम सात बजे बंद होना शुरू हो गए थे मगर जो लोग पहले से पंक्तियों में खड़े थे उन्हें मतदान करने दिया गया.

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Image caption मतदान करने वाले कई लोगों ने गर्व से स्याही लगी उंगली दिखाई

चुनाव नतीजे सोमवार को आने की संभावना है.

मतदाता मतदान केंद्रों से नीली स्याही लगी उंगली के साथ निकले और वे काफ़ी गर्व से उसे दूसरों को दिखा रहे थे.

मोहम्मद बुआज़ीज़ी ने दिसंबर महीने में ख़ुद को आग लगा ली थी और उसके बाद ही ट्यूनीशिया में विद्रोह की आग भड़क उठी थी. उनकी माँ ने कहा, "मैं आशावादी हूँ और मैं अपने देश की सफलता की कामना करती हूँ."

एक मतदाता हुसैन ख़लीफ़ी ने बताया कि वह उत्साह के चलते रात भर सो ही नहीं सके और सुबह ही मतदान के लिए जा पहुँचे.

पड़ोसी देश लीबिया के मुक़ाबले ट्यूनीशिया में तानाशाही से लोकशाही की तरफ़ की राह आम तौर पर शांतिपूर्ण रही है.

एन्नाहदा एक आधुनिक इस्लामी पार्टी है और उसने ट्यूनीशियाई धर्मनिरपेक्षों की उस आशंका को ख़ारिज किया है जिसमें लोकतंत्र के लिए प्रतिबद्धता और महिलाओं के अधिकार की बात कही गई थी.

सैकड़ों विदेशी चुनाव पर्यवेक्षक और हज़ारों स्थानीय पर्यवेक्षक चुनाव पर नज़र रखे हैं.

यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षक दल ने कहा कि आम तौर पर चुनाव अभियान पारदर्शी ही रहा.

वैसे बेन अली 14 जनवरी को सत्ता से हटा दिए गए थे और वह सऊदी अरब भाग गए थे. मगर उसके बाद के नौ महीनों में अर्थव्यवस्था बिगड़ी है क्योंकि व्यापार और पर्यटन क्षेत्र में देश को नुक़सान हुआ है.

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