ट्यूनीशिया चुनाव: प्रश्नोत्तर

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Image caption क़रीब 55 फ़ीसदी ट्यूनीशियावासी मत डालने के लिए पंजीकृत हैं

ट्यूनीशिया के मतदाता रविवार को पहली बार हो रहे व्यापक आम चुनावों में मतदान कर रहे हैं. ट्यूनीशिया अरब क्रान्ति के बाद सत्ता परिवर्तन करने वालों देशों में पहला था. ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति ज़ैनुल आबदीन बिन अली 23 साल सत्ता में रहने के बाद भारी जन विरोध के चलते सत्ता छोड़ने को मजबूर हुए थे.

यह चुनाव क्यों महत्वपूर्ण हैं ?

यह चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योकि इन चुनावों का ट्यूनीशिया के भविष्य पर गहरा असर पड़ेगा. अगर यहाँ पूरी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होते हैं तो इन चुनावों के परिणामों से सीरिया, बहरीन और यमन जैसे अरब देशों में प्रजातंत्र के लिए लड़ रहे लोगों का उत्साहवर्धन होगा.

निर्वाचित प्रतिनिधि क्या करेगें?

मतदाता इन चुनावों में संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव करेगें जो ट्यूनीशिया का नया संविधान लिखेगें और राष्ट्रीय अंतरिम सरकार का भी गठन करेगें.इस संविधान सभा के पास नया संविधान लिखने के लिए एक साल का वक़्त होगा. देश का 1959 में बना मूल संविधान अभी राष्ट्रपति को बहुत ज़्यादा ताकतवर बनाता है.

यह संविधान सभा यह भी तय करेगी कि यह सीधे संविधान बनाए या संविधान के प्रस्तावों के ऊपर जनमत संग्रह कराये.

इन चुनावों का स्वरुप क्या है ?

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Image caption ट्यूनीशिया में एक आदमी प्रत्याशियों की तस्वीर वाला पर्चा लिए हुए

इन चुनावों में संविधान सभा के 219 सदस्य चुने जाने हैं. इनमे से 199 सीटें पर ट्यूनीशिया में रह रहे नागरिक चुनाव करेगें. शेष 18 पर देश के बाहर के छह स्थानों पर रह रहे देश के निवासी अपने प्रतिनिधि चुनेगें.

इन चुनावों में कौन कौन से मुख्य दल है ?

एन्नाहदा एक इस्लामी पार्टी है. इसके बारे में यह मशहूर है कि देश में इसके पास सबसे ज़्यादा जन समर्थन है. ऐसे कयास लगाये जा रहे हैं कि इस दल को सबसे ज़्यादा सीटें मिल सकती हैं. देश के पूर्व राष्ट्रपति ज़ैनुल आबदीन बिन अली के ज़माने में इस दल के ऊपर प्रतिबंध था. इस दल ने नेता राशिद गनूची हाल ही में 20 साल विदेश में बिताने के बाद वापस लौटे हैं. गनूची कहते हैं कि उनका दल इस्लाम आर आधुनिकता के बीच में संतुलन बिठा कर काम कर सकता है. वो महिलाओं के अधिकारों और खुले नैतिक रवैय्ये का सम्मान करने की बात भी करते हैं.

द प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक पार्टी देश में सबसे बड़ा स्थापित धर्मनिरपेक्ष दल है. यह दल उन कुछ दलों में से एक है जिन पर बिन अली के ज़माने में प्रतिबंध नहीं था. इस दल के नेता नागौइब चेबी ट्यूनीशिया के जनवरी से आंचलिक विकास मंत्री के रूप में काम कर रहे हैं. इस दल ने अब तक एन्नाहदा के साथ गठबंधन को लेकर कोई उत्साह नहीं दिखाया है लेकिन इस बात से इंकार भी नहीं किया है.

एत्त्कातोल नाम एक और दल है जो 1994 में स्थापित किया गया था. इस दल का कहना है कि यह किसी भी प्रजातांत्रिक दल के साथ मिल कर काम करने के लिए तैयार है.

मीडिया इन चुनावों को कैसे देख रहा है ?

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Image caption ट्यूनीशिया में चुनावों का अभ्यास करते अधिकारी

देश में चुनाव कराने के लिए बने प्राधिकरण ने चुनावों से जुड़े मामलों पर टिप्पणियाँ और विश्लेषण करने पर प्रतिबंध लगा दिया है बावजूद इसके ट्यूनीशिया के अखबारों में राजनीति पर विचार विमर्श हो रहा है. चुनाव प्राधिकरण का कहना है कि प्रतिबंध केवल इसलिए लगाये गए हैं क्योंकि देश में इस समय चुनाव पूर्व सर्वेक्षण और अनुमानों के प्रसारण को लेकर कोई कानून नहीं है जिसकी वजह से मीडिया का दुरूपयोग हो सकता है. देश में राजनितिक विज्ञापन देने पर भी प्रतिबंध है.

चुनावों की निगरानी कौन कर रहा है ?

चूंकि यह चुनाव इतने महत्वपूर्ण हैं और इसके पहले देश में होने वाले चुनावों में बहुत धांधलियां होती थीं इसलिए कई बाहरी और आतंरिक पर्यवेक्षक इन चुनावों पर नज़र रखें हुए हैं.

चुनाव प्राधिकरण के कई सामाजिक कार्यकर्ता इसके अलावा कई यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षक भी इन चुनावों की पारदर्शिता पर नज़र रखने के लिए ट्यूनीशिया में मौजूद हैं. प्राधिकरण के अनुसार इन चुनावों में 5000 पर्यवेक्षक होंगें जिनमे से 1000 विदेशी हैं.

अब तक चुनावों की तैयारी कैसे रहीं ?

इन चुनावों को पहले तय समयसीमा से तीन महीने आगे खिसकाना पड़ा क्योंकि ट्यूनीशिया में क़रीब चार लाख नागरिकों के पहचान पत्र पुराने पड़ चुके थे और उन्हें वोट डालने का अधिकार नहीं रह गया था.

वैसे इन चुनावों में मत डालने के लिए मतदाताओं का पंजीकरण आशा से कम हुआ बावजूद इसके क़रीब 55 फ़ीसदी ट्यूनीशियावासी मत डालने के लिए पंजीकृत हैं.