'भारत के साथ निवेश संधि नेपाल के हित में'

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Image caption भारत के साथ हुए समझौते के विरोधियों ने बाबूराम भट्टाराई को काले झंडे दिखाए गए थे.

नेपाल के प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टाराई ने पिछले सप्ताह नई दिल्ली में की गई निवेश सुरक्षा संधि का जोरदार बचाव किया है.

सोमवार को संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री भट्टाराई ने कहा कि संधि का उद्देश्य आंतरिक निर्माण क्षमता और रोजगार बढ़ाने के लिए भारतीय निवेश को आकर्षित करना था.

द्विपक्षीय निवेश और संरक्षण करार पर नई दिल्ली में शुक्रवार को हस्ताक्षर किए गए थे.

विरोध

उसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री को अपनी पार्टी के एक अनुभाग यानि एकीकृत कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का विरोध झेलना पड़ा था.

भट्टाराई के रविवार को काठमांडू लौटने पर उपाध्यक्ष मोहन बैद्य किरण के नेतृत्व में पार्टी के कट्टरपंथियों के समर्थकों ने काले झंडे दिखा कर उनका स्वागत किया.

कट्टरपंथियों का कहना है कि वे समझौते के खिलाफ हैं क्योंकि यह 'राष्ट्र विरोधी' है.

सौदा विदेशी निवेश के लिए सुरक्षा की गारंटी देता है और इसमें राजनीतिक अशांति के कारण उद्योगों को नुकसान होने की सूरत में मुआवजे के प्रावधान हैं.

कट्टरपंथियों ने कहा है कि ऐसे प्रावधान देश के हित में नहीं है.

'न बनाएं विवाद'

बीबीसी संवाददाता संजय ढकाल का कहना है कि प्रधानमंत्री ने सोमवार को संसद में कहा कि देशभक्ति और राष्ट्रवाद को पक्षपातपूर्ण या गुटीय हित को पूरा करना के लिए विवाद का विषय नहीं बनाना चाहिए.

उन्होंने कहा, "मैं देश में विदेशी निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर कोई असहमति नहीं देखता. इसलिए हमें स्पष्ट होना चाहिए. एक तरफ हम विदेशी निवेश बढ़ाने के बारे में बात करते हैं और दूसरी तरफ निवेश को बढ़ाने वाले समझौते को अस्वीकार करते हैं."

प्रधानमंत्री ने कहा कि नेपाल ने फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, मॉरीशस और फिनलैंड के साथ पहले ही इस तरह के समझौते कर रखे हैं.

उन्हें उम्मीद है कि यह सौदा भारत के साथ नेपाल के बढ़ते व्यापार के घाटे को कम करेगा.

नेपाल भारत के साथ अपने कुल विदेशी व्यापार का 66 प्रतिशत व्यापार करता है.

भारत के साथ नेपाल के अपने व्यापार के कुल 3.2 अरब अमरीकी डॉलर में से नेपाल का घाटा 2.7 अरब अमेरिकी डॉलर है.

प्रधानमंत्री ने कहा, "कोई भी देशभक्त व्यक्ति इस चुनौती को नजरअंदाज नहीं कर सकता."

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