गद्दाफ़ी को 'गुप्त जगह सुबह दफ़नाया' गया

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लीबिया के अंतरिम प्रशासन (एनटीसी)के अधिकारियों ने कहा है कि कर्नल गद्दाफ़ी के शव को अज्ञात जगह पर दफ़ना दिया गया है.

इस बीच ख़बर है कि सिर्त में हुए एक धमाके में 50 लोग मारे गए हैं.

एनटीसी के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा है कि गद्दाफ़ी को सुबह दफ़नाया गया. प्रवक्ता ने बताया कि उनके बेटे को भी गद्दाफ़ी के साथ दफ़न किया गया है. इसके अलावा एक अन्य व्यक्ति को भी दफ़ना दिया गया है.

जानकारी के मुताबिक गद्दाफ़ी के कुछ रिश्तेदार और अधिकारी इस दौरान मौजूद थे. इससे पहले सोमवार तक गद्दाफ़ी का शव मिसराता में एक कोल्ड स्टोरेज में रखा गया था.

कर्नल गद्दाफ़ी का परिवार चाहता था कि उन्हें सिर्त के पास दफ़नाया जाए लेकिन अधिकारियों ने उन्हें गुप्त रूप से दफ़नाने को तरजीह दी है.

अंतरिम सरकार के एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया है कि गद्दाफ़ी को सुपुर्दे-ख़ाक करना ज़रूर हो गया था शव ख़राब होने लगे थे और उसे और नहीं रखा जा सकता था. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तीनों लोगों के शवों को रात को ही कोल्ड स्टोरेज से हटा दिया गया था.

स्टोरेज के सुरक्षागार्ड ने अल जज़ीरा को बताया, "हमारा काम ख़त्म हो गया. मिसरात की सैन्य परिषद को एक अज्ञात जगह ले गई."

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक कर्नल गद्दाफ़ी के शव का क्या किया जाए ये नई लीबियाई नेतृत्व के लिए बड़ा सवाल बना हुआ था और इसीलिए किसी नतीजे पर पहुँचने में चार दिन का समय लगा.

नेता चिंतित थे कि अगर कब्र सार्वजनिक हुई तो वो गद्दाफ़ी समर्थकों के लिए किसी स्मारक की तरह बन जाएगी या फिर उनके विरोधी इसे निशाना बना सकते हैं.

संवाददाता के मुताबिक गद्दाफ़ी का शव सड़ने लगा था और इसलिए सरकार को फ़ैसला करना पड़ा.

शव को लेकर उलझन

20 अक्तूबर को इस बात की घोषणा हुई थी कि सिर्त पर कब्ज़ा पाने की कोशिश के दौरान कर्नल गद्दाफ़ी मारे गए हैं. लेकिन गद्दाफ़ी की मौत किन हालातों में हुई ये अब भी अस्पष्ट है.

अंतरिम सरकार का कहना था कि सिर्त में संघर्ष के दौरान कर्नल गद्दाफ़ी घायल हो गए थे. और गोलीबारी के दौरान उन्हें सिर में गोली मारी गई.

गद्दाफ़ी से जुड़े वीडियो भी सामने आए हैं. वीडियो फ़ुटेज में नज़र आता है कि पकड़े जाने के समय गद्दाफ़ी ज़िंदा थे. वे घायल और ख़ून से लथपथ नज़र आ रहे थे. वीडियो फ़ुटेज से यह भी लग रहा है कि उन्हें सड़कों पर घसीटा गया था.

अब ये माँग उठ रही है कि इस बात की जाँच हो कि आख़िर गद्दाफ़ी की मौत कैसे हुई. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त ने भी ये माँग की है.

मुआमार गद्दाफ़ी सितंबर 1969 में सत्ता में आए थे. उन्होंने सम्राट इदरिस को एक सैनिक कार्रवाई में सत्ता से हटाया था.

क़रीब 41 साल सत्ता में रहते हुए उन्होंने सरकार चलाने की अपनी ही एक व्यवस्था खोजी जिसमें उत्तरी आयरलैंड के आईआरए जैसे हथियारबंद चरमपंथी गुटों के साथ-साथ फ़िलीपीन्स में इस्लामी कट्टरपंथी गुट अबु सय्याफ़ जैसी संस्थाओं को समर्थन दिया.

अरब जगत में पिछले डेढ़ साल से आए राजनीतिक बदलावों और आंदोलनों का असर लीबिया पर भी पड़ा और लोग साल 2011 की शुरूआत में 40 साल पुराने शासन के ख़िलाफ़ खड़े हो गए.

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