चीन के नए क़ानून ने दी 'आतंक' की परिभाषा

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Image caption क़ानून बताता है कि सुरक्षा बलों को चरमपंथी गतिविधियों से कैसे निपटना चाहिए

आतंकवाद की स्पष्ट परिभाषा देते हुए चीन ने शनिवार को एक नया क़ानून पारित कर दिया है.

अधिकारियों ने कहा कि क़ानून बताता है कि सुरक्षा बलों को आतंक के कार्यों से कैसे निपटना चाहिए. यह क़ानून सरकार को संदिग्धों के नाम सार्वजनिक करने और उनकी संपत्ति ज़ब्त करने का अधिकार भी देता है.

क़ानूनी अधिकारी ली वेशऊ ने संवाददाताओं को बताया, "हमारे देश को आतंकवादी गतिविधियों से एक वास्तविक ख़तरे का सामना करना पड़ रहा है और लड़ाई लंबी और जटिल होगी. यह दिन-प्रतिदिन तीव्र होती जाएगी."

उन्होंने कहा कि संदिग्धों की सूची और चरमपंथी समूहों की लिस्ट सरकार बाद में प्रकाशित करेगी.

ली ने कहा कि नया क़ानून आतंक का समर्थन करने वालों के ख़िलाफ़ लड़ने में चीन की अंतरराष्ट्रीय भागीदारी में मदद करेगा.

क्या है कानून ?

चीन के मीडिया ने कहा कि कानून के अनुसार "ऐसे कोई भी कार्य जो सार्वजनिक भय को प्रेरित करेंगा या हिंसा, तोड़फोड़, धमकी या अन्य रणनीति के माध्यमों से राज्य या अंतरराष्ट्रीय संगठनों को मजबूर करने के इरादे से किया जाए, वह आतंकवादी वारदात कहलाएगा."

सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार यह सारे कार्य समाज के लिए गंभीर नुकसान का कारण बन सकते हैं और बड़े आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं.

शिन्हुआ के मुताबिक ऐसी कार्रवाई सार्वजनिक सुविधाओं को नुकसान पहुँचाने या सामाजिक व्यवस्था में उथल-पुथल पैदा करने की क्षमता रखते हैं.

चीन का कहना है कि चीन में मौजूद चरमपंथी समूह अल क़ायदा का साथ दे रहे हैं और मध्य एशियाई चरमपंथी अलगाववाद के मक़सद से सक्रिय हैं.

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