इतिहास के पन्नों में 31 अक्तूबर

  • 31 अक्तूबर 2011

अगर इतिहास के पन्नों को पलटें, तो पाएंगें कि आज के दिन जहां 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी, तो वहीं 2003 में मलेशिया के प्रधानमंत्री माहातिर मोहम्मद ने 22 साल बाद सत्ता छोड़ी थी.

1984: इंदिरा गांधी की हत्या की गई

Image caption उनके ही अंगरक्षकों ने इंदिरा गांधी की गोली मार कर हत्या कर दी थी

31 अक्तूबर 1984 के दिन भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी.

ये घटना तब घटी, जब सुबह के वक़्त वे अपने बागीचे में टहल रही थी. उनके ही अंगरक्षकों ने उन्हें गोली मार दी थी.

इसके बाद उन्हें एम्स ले जाया गया जहां उनके शरीर में से गोलियां निकालने के लिए उनका आपात ऑपरेशन हुआ, लेकिन डेढ़ घंटे के भीतर उनकी अस्पताल में ही मौत हो गई.

माना जाता है कि उनके सिख अंगरक्षकों ने उन पर हमला इसलिए किया क्योंकि वे अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में हुई सैन्य कार्रवाई यानी ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला लेना चाहते थे.

स्वर्ण मंदिर पर हुए हमले में हज़ारों लोग मारे गए थे. इस घटना के बाद से ही इंदिरा गांधी को कई धमकियां दी जा चुकी थीं.

इंदिरा गांधी की मौत के बाद पूरे देश में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी और दिल्ली की सीमावर्ती इलाकों को सील कर दिया गया था.

उनकी मौत के बाद हिंदू और सिख समुदायों के बीच दंगे भी शुरू हो गए थे, जिसमें कम से कम 1,000 लोग मारे गए थे.

इंदिरा गांधी की मौत के बाद उनके पुत्र राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनाया गया और दिसंबर 1984 के चुनावों में उन्होंने भारी मत से जीत हासिल की.

इंदिरा गांधी के हत्यारों, सतवंत सिंह और केहर सिंह को 1989 में फांसी दे दी गई जबकि बलबीर सिंह को बरी कर दिया गया.

2003: मलेशिया में महातिर युग का अंत

आज ही के दिन मलेशिया के प्रधानमंत्री माहातिर मोहम्मद ने 22 साल बाद सत्ता छोड़ी थी.

1957 में मलेशिया की स्वतंत्रता के बाद डॉक्टर महातिर ने मलेशिया पर तब से शासन किया था, जब वहां की 40 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या पैदा भी नहीं हुई थी.

उनके शासनकाल में मलेशिया औद्योगिकृत देश बनने की राह पर था.

लेकिन 78 वर्षीय महातिर की छवि को तब झटका लगा, जब वे पश्चिमी देशों की आलोचना करने लगे और निरंकुश शासन को बढ़ावा देने लगे.

उन्होंने कहा था कि यहूदी गुट पूरे विश्व पर राज कर रहे हैं. उनके इस बयान की बाहरी देशों ने कड़ी आलोचना की थी.

उप प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम को भी बर्ख़ास्त किए जाने के उनके फ़ैसले की कड़ी आलोचना हुई थी.

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