सात अरब हो गई दुनिया की आबादी

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Image caption पिछले 50 वर्षों में दुनिया की आबादी दोगुनी हो गई है

संयुक्त राष्ट्र के आकलन के मुताबिक़ दुनिया की आबादी सात अरब हो गई है.

फिलीपिंस की राजधानी मनीला में सांकेतिक रूप में सात अरबवें बच्चे का जन्म हुआ. डानिका मे कमाचो नाम की इस लड़की का जन्म मध्यरात्रि के आसपास हुआ.

फिलीपिंस में इसे सांकेतिक रूप में सात अरबवें बच्चे का दर्जा दिया गया है. फिलीपिंस में मौजूद संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने इस बच्ची को केक भेंट किया.

दूसरी ओर ग़ैर सरकारी संगठन प्लान इंटरनेशनल भारत में लखनऊ के निकट एक गाँव में पैदा हुई बच्ची को सांकेतिक रूप में सात अरबवें बच्चे के रूप में मान रही है.

पिछले 50 वर्षों में दुनिया की आबादी दोगुनी हो गई है. संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1999 में दुनिया की आबादी छह अरब पहुँचने पर कुछ कार्यक्रम आयोजित किए थे.

उस समय बोस्निया के एक बच्चे को छह अरबवाँ बच्चा माना गया था. लेकिन इस बार संयुक्त राष्ट्र ऐसा कुछ नहीं कर रहा है. इससे उलट संयुक्त राष्ट्र ने लोगों को बढ़ती आबादी के प्रति सचेत किया है.

मुश्किल

लेकिन संयुक्त राष्ट्र में आबादी का आकलन करने वाली इकाई के प्रमुख गेरहार्ड हिलिक ने इस दावे को बेमतलब बताया है और कहा है कि ये कहना काफ़ी मुश्किल है कि सात अरबवाँ बच्चा कहाँ पैदा होगा.

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने ख़ुद कहा है कि उसके आकलन में 1-2 प्रतिशत तक की ग़लती हो सकती है. यानी 31 अक्तूबर को दुनिया की आबादी सात अरब से क़रीब साढ़े पाँच करोड़ ज़्यादा या इतनी ही कम भी हो सकती है.

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र का ये कहना कि 31 अक्तूबर को दुनिया का सात अरबवाँ बच्चा पैदा होगा, इस बात पर ज़ोर देता है कि बढ़ती आबादी चिंता का विषय है.

माना जा रहा है कि प्लान इंटरनेशनल का भारत में एक बच्ची को सात अरबवाँ बच्चा मानने के पीछे उस समस्या को सामने लाना है, जो भारत में आम है. और वो समस्या है बच्चियों को गर्भ में मार देना.

आकलन ये भी है कि भारत में वर्ष 2010 से 2015 के बीच आबादी सबसे तेज़ी से बढ़ेगी. अनुमान है कि इन पाँच वर्षों में भारत की आबादी 13 करोड़ 50 लाख बढ़ जाएगी, जबकि चीन में इन्हीं पाँच वर्षों में सिर्फ़ आठ करोड़ आबादी बढ़ने का अनुमान है.

बढ़ती आबादी

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Image caption प्लान इंटरनेशनल का कहना है कि सात अरबवाँ बच्चा भारत में पैदा होगा

पचास साल पहले विश्व की जनसंख्या तीन अरब थी. कहा जा रहा है कि साल 2100 तक ये 10 अरब की सीमा को जा सकती है.

साल 1804 तक विश्व जनसंख्या धीमी गति से बढ़ते हुए एक अरब तक पहुंची थी, लेकिन पिछले दो सौ वर्षो में विश्व की जनसंख्या की रफ़्तार बहुत तेज़ रही है.

संयुक्त राष्ट्र के आकलन में इस बात पर ख़ास तौर से गौ़र किया गया है कि जनसंख्या की अत्यधिक वृद्धि विकासशील देशों में पाई गई है.

हालांकि जनसंख्या के इस नए रिकार्ड बनने पर चिंताएं अत्याधिक हैं. पृथ्वी पर मौजूद प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता के साथ साथ ग़रीबी की बढ़ती दर भी चिंता का एक विषय बना हुआ है.

आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि पृथ्वी आखिर कितने और दिनों तक निरंतर बढती हुई जनसँख्या का भार सह सकेगी?

चिंताएँ

ये पाया गया है कि जनसंख्या की अत्यधिक वृद्धि विकासशील देशों में हो रही है.

विश्व के 10 सर्वाधिक जनसंख्या वाले देशों में सिर्फ़ तीन विकसित देश अमरीका, रूस और जापान शामिल हैं.

विशेषज्ञों के मुताबिक आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के कारण समाज में मृत्युदर में गिरावट आती है और जन्म दर में वृद्धि.

संयुक्त राष्ट्र के ताज़े अनुमान के मुताबिक़ साल 2050 तक दुनिया की 86 प्रतिशत आबादी विकसित इलाक़ों में निवास करेगी.

जबकि 2050 तक जनसंख्या में होने वाली वृद्धि में विकासशील देशों का योगदान भी 97 प्रतिशत रहेगा.

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