इतिहास के पन्नों में दो नवंबर

इतिहास में दो नवंबर की तारीख़ कई घटनाओं के लिए महत्वपूर्ण है.

1986: बेरूत में अमरीकी बंधक रिहा

बेरूत में इस्लामी चरमपंथियों के ज़रिए बंधक बनाए गए एक अमरीकी नागरिक डेविड जैकोब्सन को रिहा कर दिया गया था.

इस्लामी जिहाद गुट के चरमपंथियों ने डेविड जैकोब्सन को 17 महीनों तक क़ैद में रखने के बाद आख़िरकार रिहा कर दिया.

55 वर्षीय जैकोब्सन को मई 1985 मे उस वक़्त अग़वा कर लिया गया था जब वो बेरूत स्थित अमरीकी विश्वविधालय अस्पताल के परिसर में बने अपने घर से अस्पताल जा रहे थे.

उनकी रिहाई में कैंटरबेरी के आर्चबिशप के विशेष दूत टेरी वेट ने अहम भूमिका निभाई थी.

अमरीकी राष्ट्रपति के प्रवक्ता लैरी स्पिक्स ने कहा कि लेबनान में दूसरे बंदियों की सुरक्षा को ख़्याल में रखते हुए वो इस बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दे सकते हैं.

उस समय कम से कम दो और अमरीकी नागरिक, कई फ़्रांसिसी नागरिक और एक ब्रितानी नागरिक जॉन मैकार्थी बेरूत में बंधक थे.

1988: इसराइल चुनाव में त्रिशंकु संसद

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Image caption इसराइल में हुए आम चुनाव में किसी को बहुमत नहीं मिली, आख़िरकार शमीर गठबंधन सरकार के प्रधानमंत्री बने.

इसराइल में हुए आम चुनावों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सका था और दो प्रमुख पार्टियों में सिर्फ़ एक सीट का अंतर था.

सत्ताधारी लिकुड पार्टी को 40 सीटें मिली थीं जबकि लेबर पार्टी को 39 सीटों पर जीत हासिल हुई थी.

उस चुनाव में दोनों पार्टियों को कुछ सीटों का नुक़सान हुआ था.

लेकिन इस चुनाव में दक्षिणपंथी धार्मिक पार्टियों ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 18 सीटों पर जीत हासिल की थी और लिकुड पार्टी के नेता यित्ज़क शमीर इनके साथ मिलकर सरकार बनाना चाहते थे लेकिन धार्मिक पार्टियों के अंदरूनी कलह के कारण उनसे गठबंधन नहीं हो सका.

आख़िरकार लिकुड पार्टी ने लेबर पार्टी के साथ गठबंधन सरकार बनाई जिसमें यित्ज़क शमीर प्रधानमंत्री बने और लेबर पार्टी को कई अहम मंत्रालय दिए गए.

1951: छह हज़ार ब्रितानी सेना मिस्र पहुंची

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Image caption सूयेज़ नहर के राष्ट्रीयकरण के बाद इसराइल, ब्रिटेन और फ़्रांस ने मिलकर मिस्र पर हमला कर दिया.

मिस्र में ब्रिटेन विरोधी प्रदर्शनों पर क़ाबू पाने के लिए लगभग छह हज़ार ब्रितानी सेना मिस्र पहुंची.

दूसरे विश्व युद्घ के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में ब्रितानी सेना को किसी और देश में भेजा गया था.

ब्रितानी सैनिकों और मिस्र के पुलिसकर्मियों के बीच हिंसक झड़पें होने लगी और तीन सप्ताह के बाद ब्रिटेन ने मिस्र में रह रहे अपने हज़ारों नागरिकों को वहां से वापस बुला लिया.

सेना ने वहां 1952 में तख़्ता पलट दिया और 1953 में संवैधानिक राजशाही को ख़त्म कर दिया गया.

1954 में अरब राष्ट्रवादी नेता गमाल अब्दुल नासिर सत्ता में आए और उन्होंने 1956 में स्वेज़ नहर को राष्ट्रीयकृत कर दिया. उनके इस फ़ैसले से नाराज़ होकर ब्रिटेन, फ़्रांस और इसराइल ने मिलकर मिस्र पर हमला कर दिया.

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