लीबिया के हथियारों पर सुरक्षा परिषद चिंतित

  • 1 नवंबर 2011
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Image caption सुरक्षा परिषद को डर है कि कहीं ये हथियार अल क़ायदा के हाथ में न पड़ जाएँ

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने कर्नल गद्दाफ़ी के अधीन लीबिया में बड़ी संख्या में जमा किए गए हथियारों को लेकर चिंता जताई है.

सुरक्षा परिषद को डर है कि कहीं ये हथियार अल क़ायदा और अन्य चरमपंथी गुटों के हाथ न लग जाएँ.

परिषद ने लीबिया और उसके पड़ोसी देशों से अपील की है कि वे लूटे गए हथियारों को इधर-उधर न जाने दें.

रूस ने सुरक्षा परिषद में यह प्रस्ताव पेश किया, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया.

इस प्रस्ताव में कहा गया है कि कर्नल गद्दाफ़ी के शासनकाल में कंधे पर रखकर हवा में मार करने वाले मिसाइलों को जमा किया गया था और इन मिसाइलों से अब भी यात्री विमानों को ख़तरा है.

कार्रवाई

नेटो की कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में हथियारों को नष्ट कर दिया गया था, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अभी ये स्पष्ट नहीं है कि अभी कितने हथियार बचे हुए हैं.

सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में लीबिया से यह भी अपील की गई है कि वो अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय करके रासायनिक हथियारों को नष्ट करे.

ये प्रस्ताव ऐसे समय आया है कि जब नेटो ने सात महीने बाद आधिकारिक रूप से लीबिया में अपनी कार्रवाई समाप्त कर दी है. 19 मार्च को सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव के बाद नेटो ने लीबिया में कार्रवाई शुरू की थी.

त्रिपोली में कार्रवाई समाप्त करने की औपचारिक घोषणा करते हुए नेटो प्रमुख आंद्रे फ़ॉ रासमूसेन ने कहा कि नेटो की सेना ने लीबिया में जनसंहार को रोका और न जाने कितने लोगों की ज़िंदगियाँ बचाई.

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