हिंसा के बीच अरब शांति योजना पर 'सीरियाई सहमति'

अरब शांति योजना इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption अरब शांति योजना के तहत सीरिया की सरकार सड़कों से सुरक्षाबलों को हटाएगी.

ब्रिटेन की एक मानवाधिकार संस्था के मुताबिक 15 सीरियाई सैनिकों और सरकार के हथियारबंद समर्थकों को सीरियाई सेना से निकले विद्रोहियों ने मार दिया है.

सीरियन ऑबज़र्वेटरी फॉर ह्युमन राईट्स संस्था के अनुसार हामा प्रांत में हुए एक बम हमले में सात सैनिकों की मौत हुई है.

संस्था का कहना है कि इसी प्रांत में हुए दूसरे हमले में आठ सुरक्षाकर्मी भी मारे गए है.

दोनों हमले अरब लीग की उस घोषणा के बाद हुए है जिसमें कहा गया था कि सीरिया ने शांति योजना पर सहमति जताई है और कहा है कि हिंसा बंद होगी.

अरब शांति योजना के तहत सीरिया की सरकार सड़कों से सुरक्षाबलों को हटाएगी और वहा हो रही नागरिकों की कथित हत्याओं को तुरंत रोकेगी.

योजना के अंतर्गत सरकार और विद्रोहियों के बीच बातचीत के लिए समय सीमा भी निर्धारित की गई है.

सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन मार्च से जारी है जो कि अब हिंसक हो गई है.

शांति योजना

सीरियन ऑबज़र्वेटरी फॉर ह्युमन राईट्स संस्था के एक अधिकारी के अनुसार होम्स और हामा शहर टैंकों से घिरे है.

सीरिया की सेना के विद्रोही इन्ही टैंकों के बीच का रास्ता नागरिकों और प्रदर्शनकारियों के लिए खाना और दवाईयां लाने ले जाने के लिए इस्तेमाल कर रहे है.

विद्रोहियों के मुताबिक हमलें उस समय किए गए जब हथियारबंद सैनिक होम्स शहर के एक कारखाने में घुस आए थे.

उनके अनुसार कारखाने के 11 मज़दूर हौला जिले में हुए इस हमले में मारे गए थे.

संस्था का कहना है कि इसी बीच सुरक्षाबलों ने होम्स में आठ नागरिकों की हत्या कर दी है.

शांति योजना के तहत सीरिया पत्रकारों, मानवाधिकार संस्थानों और अरब लीग के नुमाइंदो को देश में तनावग्रस्त इलाकों में मुक्त तौर पर आने जाने का अधिकार देंगे.

संकट का हल

काहिरा में मौजूद बीबीसी संवाददाता जॉन लेन का कहना है कि इस योजना को पूरे तरह से लागू करने पर मौजूदा संकट का हल निकल सकता है.

जॉन लेन के मुताबिक सैनिकों को सड़को से हटाने पर राष्ट्रपति असद का सत्ता पर से कब्ज़ा छूट जाएगा.

सीरिया में चल रहे विरोध-प्रदर्शन में अभी तक कम से कम 3,000 लोग मारें जा चुके है जबकि सैकड़ो गायब है.

साल 2000 में सत्ता में आए अल असद की नेतृत्व वाली सरकार का कहना है कि हिंसा हथियारबंद चरमपंथियों की ओर से की जा रही है.

सीरिया में विदेशी पत्रकारों के खुले तौर पर आने-जाने पर पाबंदी है.

साथ ही सभी जानकारियां पूरी तरह से नियंत्रित की जा रही है जिससे ख़बरों की पुष्टि करना काफ़ी मुशकिल हो गया है.

संबंधित समाचार